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सुप्रीम कोर्ट: इंटरनेट तक पहुँच अनुच्छेद 21 सहपठित 19(1)(a) के तहत मौलिक अधिकार, बच्चे भी शामिल; पूर्ण प्रतिबंध समाधान नहीं

15 अक्टूबर 2026 के आदेश में न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और के. विनोद चंद्रन की सुप्रीम कोर्ट पीठ ने कहा कि इंटरनेट तक पहुँच और उसका उपयोग अनुच्छेद 21 सहपठित अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत मौलिक अधिकार है, जो बच्चों को भी प्राप्त है।

सारांश

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इंटरनेट तक पहुँच और उसका उपयोग संविधान के अनुच्छेद 21 सहपठित अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत हर व्यक्ति का मौलिक अधिकार है और किसी भी आयु के बच्चों को भी यही अधिकार प्राप्त है। 15 अक्टूबर 2026 का यह आदेश, जो 17 अक्टूबर को सार्वजनिक हुआ, न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और के. विनोद चंद्रन की पीठ ने ऑनलाइन बाल यौन शोषण एवं दुर्व्यवहार सामग्री (CSEAM) पर NGO जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन अलायंस की याचिका पर दिया। अदालत ने कहा कि बच्चों के इंटरनेट उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध अनुपातहीन है और इसके बजाय माता-पिता की निगरानी, आयु-अनुकूल सुरक्षा उपाय और एक समर्पित ‘चाइल्ड मोड’ सुझाया। अदालत ने याद दिलाया कि अनुराधा भसीन (2020) मामले में इंटरनेट के माध्यम से अभिव्यक्ति और व्यापार को अनुच्छेद 19(1)(a) और 19(1)(g) के तहत संरक्षित माना गया था, पर इंटरनेट तक पहुँच स्वयं मौलिक अधिकार है या नहीं, यह प्रश्न खुला छोड़ा गया था।

मुख्य तथ्य

न्यायालय
भारत का सर्वोच्च न्यायालय
पीठ
न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और के. विनोद चंद्रन
आदेश तिथि
15 अक्टूबर 2026 (17 अक्टूबर को सार्वजनिक)
निर्णय
इंटरनेट तक पहुँच और उपयोग मौलिक अधिकार है
संवैधानिक आधार
अनुच्छेद 21 सहपठित अनुच्छेद 19(1)(a)
याचिकाकर्ता
NGO जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन अलायंस (CSEAM मामला)
सुझाए गए उपाय
माता-पिता की सहमति/निगरानी, समर्पित ‘चाइल्ड मोड’, डिफ़ॉल्ट रूप से निजी खाते
पूर्व मामला
अनुराधा भसीन बनाम भारत संघ (10 जनवरी 2020) – अनुच्छेद 19(1)(a) और 19(1)(g)

अभ्यास MCQ 3 प्रश्न

Q1

अक्टूबर 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने इंटरनेट तक पहुँच और उपयोग के अधिकार को संविधान के किन प्रावधानों के तहत मौलिक अधिकार माना?

उत्तर देखें

सही उत्तर: C — अनुच्छेद 21 सहपठित अनुच्छेद 19(1)(a)

द हिंदू/इंडियन एक्सप्रेस: पीठ ने कहा कि इंटरनेट तक पहुँच और उपयोग अनुच्छेद 21 सहपठित 19(1)(a) के तहत मौलिक अधिकार है।
Q2 उन्नत

अक्टूबर 2026 का सुप्रीम कोर्ट का वह आदेश, जिसमें कहा गया कि बच्चों को भी इंटरनेट तक पहुँच का मौलिक अधिकार है, किन न्यायाधीशों की पीठ ने दिया?

उत्तर देखें

सही उत्तर: D — न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और के. विनोद चंद्रन

द हिंदू/इंडियन एक्सप्रेस: यह आदेश न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और के. विनोद चंद्रन की पीठ ने दिया।
Q3 उन्नत

अक्टूबर 2026 के बच्चों की इंटरनेट पहुँच पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अदालत ने बच्चों के इंटरनेट उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध के बजाय माता-पिता की निगरानी और समर्पित ‘चाइल्ड मोड’ सुझाया। 2. अदालत ने कहा कि 2020 के अनुराधा भसीन निर्णय में ही इंटरनेट तक पहुँच को स्वयं मौलिक अधिकार घोषित कर दिया गया था। उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

उत्तर देखें

सही उत्तर: A — केवल 1

इंडियन एक्सप्रेस/द हिंदू: अदालत ने पूर्ण प्रतिबंध के बजाय माता-पिता की सहमति, निगरानी और ‘चाइल्ड मोड’ का पक्ष लिया (1 सही)। अनुराधा भसीन (2020) ने इंटरनेट के माध्यम से अभिव्यक्ति और व्यापार को 19(1)(a) और 19(1)(g) के तहत संरक्षित माना था, पर इंटरनेट पहुँच स्वयं मौलिक अधिकार है या नहीं, यह प्रश्न खुला छोड़ा था (2 गलत)।

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