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सुप्रीम कोर्ट: लोक सेवक द्वारा रिश्वत माँगने की जाँच के लिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A के तहत पूर्व अनुमति ज़रूरी नहीं

16 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट (न्यायमूर्ति एस.वी.एन. भट्टी और एन.वी. अंजारिया) ने तेजाराम बनाम राजस्थान राज्य मामले में कहा कि रिश्वत माँगने की जाँच के लिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A के तहत पूर्व अनुमति आवश्यक नहीं है, क्योंकि इसका आधिकारिक कर्तव्यों से कोई संबंध नहीं है।

सारांश

सुप्रीम कोर्ट ने 16 अक्टूबर 2026 को कहा कि किसी लोक सेवक द्वारा रिश्वत माँगने की जाँच के लिए भ्रष्टाचार निवारण (PC) अधिनियम, 1988 की धारा 17A के तहत पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि ऐसी माँग एक विशुद्ध आपराधिक कृत्य है जिसका आधिकारिक कार्यों के निर्वहन से कोई संबंध नहीं है। न्यायमूर्ति एस.वी.एन. भट्टी और एन.वी. अंजारिया की पीठ (निर्णय न्यायमूर्ति अंजारिया ने लिखा) ने PC अधिनियम की धारा 7 के तहत आरोप तय किए जाने के ख़िलाफ़ राजस्थान पुलिस के कांस्टेबल तेजाराम की अपील ख़ारिज कर दी। न्यायालय ने कहा कि धारा 17A केवल तभी लागू होती है जब कथित अपराध लोक सेवक द्वारा आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन में लिए गए निर्णय या की गई सिफ़ारिश से संबंधित हो, और इसका 'सर्वव्यापी अनुप्रयोग' नहीं हो सकता।

मुख्य तथ्य

मामला
तेजाराम बनाम राजस्थान राज्य, 2026 INSC 1147
निर्णय की तिथि
16 अक्टूबर 2026
पीठ
न्यायमूर्ति एस.वी.एन. भट्टी और एन.वी. अंजारिया (लेखक: न्यायमूर्ति अंजारिया)
निर्णय
रिश्वत माँगने की जाँच के लिए धारा 17A की पूर्व अनुमति ज़रूरी नहीं
धारा 17A
आधिकारिक कर्तव्यों में लोक सेवकों के निर्णयों या सिफ़ारिशों से संबंधित अपराधों की जाँच हेतु पूर्व अनुमति
बरक़रार आरोप
धारा 7, PC अधिनियम, 1988
परिणाम
अपील ख़ारिज

अभ्यास MCQ 3 प्रश्न

Q1

अक्टूबर 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लोक सेवक द्वारा रिश्वत माँगने की जाँच के लिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की किस धारा के तहत पूर्व अनुमति आवश्यक नहीं है?

उत्तर देखें

सही उत्तर: C — धारा 17A

सुप्रीम कोर्ट (तेजाराम बनाम राजस्थान राज्य, 16 अक्टूबर 2026): रिश्वत माँगना एक विशुद्ध आपराधिक कृत्य है जिसका आधिकारिक कार्यों से संबंध नहीं, इसलिए PC अधिनियम की धारा 17A लागू नहीं होती।
Q2 उन्नत

PC अधिनियम की धारा 17A पर तेजाराम बनाम राजस्थान राज्य मामले में अक्टूबर 2026 का निर्णय सुप्रीम कोर्ट की किस पीठ ने दिया?

उत्तर देखें

सही उत्तर: D — न्यायमूर्ति एस.वी.एन. भट्टी और एन.वी. अंजारिया

सुप्रीम कोर्ट निर्णय (2026 INSC 1147): पीठ में न्यायमूर्ति एस.वी.एन. भट्टी और एन.वी. अंजारिया थे; निर्णय न्यायमूर्ति अंजारिया ने लिखा।
Q3 उन्नत

तेजाराम बनाम राजस्थान राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट के 16 अक्टूबर 2026 के निर्णय के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. न्यायालय ने कहा कि धारा 17A केवल तभी लागू होती है जब कथित अपराध लोक सेवक द्वारा आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन में लिए गए निर्णय या की गई सिफ़ारिश से संबंधित हो। 2. न्यायालय ने कांस्टेबल की अपील स्वीकार कर PC अधिनियम की धारा 7 के तहत आरोप रद्द कर दिया। उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

उत्तर देखें

सही उत्तर: A — केवल 1

सुप्रीम कोर्ट निर्णय: धारा 17A आधिकारिक कर्तव्यों में लोक सेवक के निर्णय या सिफ़ारिश से संबंधित अपराधों तक सीमित है; अपील ख़ारिज हुई और धारा 7 का आरोप बना रहा। अतः केवल कथन 1 सही है।

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