संसद ने सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पारित किया
30 जुलाई 2026 को राज्यसभा ने सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित किया; लोकसभा पहले ही इसे पारित कर चुकी थी।
सारांश
राज्यसभा ने लोकसभा द्वारा पारित सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित किया; बहस का उत्तर डॉ. जितेंद्र सिंह ने दिया। यह विधेयक 2024 के अधिनियम – परीक्षा में नकल और पेपर लीक के विरुद्ध भारत का पहला समर्पित कानून – में संशोधन कर व्यक्तिगत अपराधियों की सजा 5–10 वर्ष और जुर्माना 50 लाख रुपये तक करता है, विशेष कार्य बल (STF) का विकल्प देता है, जांच के लिए दो महीने की समय-सीमा तय करता है और हर राज्य/केंद्रशासित प्रदेश में विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट अनिवार्य करता है, जिन्हें आरोपपत्र के 3 महीने में सुनवाई पूरी करनी होगी। 2024 का अधिनियम UPSC, SSC, RRB, IBPS और NTA की परीक्षाओं पर लागू है।
मुख्य तथ्य
- विधेयक
- सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026
- संशोधित अधिनियम
- सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024
- पारित
- लोकसभा, फिर 30 जुलाई 2026 को राज्यसभा में ध्वनिमत से
- व्यक्तिगत अपराधी
- 5–10 वर्ष जेल, 50 लाख रुपये तक जुर्माना (पहले 3–5 वर्ष, 10 लाख रुपये)
- सेवा प्रदाता
- 5 करोड़ रुपये तक जुर्माना, 8 वर्ष प्रतिबंध (पहले 1 करोड़, 4 वर्ष)
- संगठित गिरोह
- 7–10 वर्ष, कम से कम 10 करोड़ रुपये जुर्माना
- जांच
- विशेष कार्य बल का विकल्प; 2 महीने में पूरी
- सुनवाई
- विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट; आरोपपत्र के 3 महीने में
- दायरा
- UPSC, SSC, RRB, IBPS, NTA परीक्षाएं
अभ्यास MCQ 4 प्रश्न
30 जुलाई 2026 को राज्यसभा ने किस कानून में संशोधन पारित कर संसद में उसकी प्रक्रिया पूरी की?
उत्तर देखें
सही उत्तर: B — सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024
राज्यसभा ने लोकसभा द्वारा पारित सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को पारित किया।
सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 के तहत व्यक्तिगत अपराधियों के लिए जेल की अवधि कितनी है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: D — 5 से 10 वर्ष
विधेयक व्यक्तिगत अपराधियों की सजा 3–5 वर्ष से बढ़ाकर 5–10 वर्ष करता है, साथ में 50 लाख रुपये तक जुर्माना।
सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक, 2026 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. परीक्षा धोखाधड़ी मामले की जांच दो महीने में पूरी करनी होगी। 2. विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट को आरोपपत्र के 3 महीने में सुनवाई पूरी करनी होगी। 3. इसे राज्यसभा ने मत-विभाजन से पारित किया। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
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सही उत्तर: A — केवल 1 और 2
विधेयक जांच के लिए दो महीने और विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई के लिए 3 महीने की समय-सीमा तय करता है; राज्यसभा ने इसे ध्वनिमत से पारित किया, मत-विभाजन से नहीं।
2026 के संशोधन के तहत संगठित परीक्षा-धोखाधड़ी गिरोहों पर न्यूनतम कितना जुर्माना है?
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सही उत्तर: C — 10 करोड़ रुपये
संगठित अपराध (धारा 11) के लिए सजा 7–10 वर्ष और कम से कम 10 करोड़ रुपये जुर्माना है (पहले कम से कम 1 करोड़ रुपये)।