नीति आयोग ने शांति अधिनियम, 2025 के कार्यान्वयन पर हितधारक परामर्श आयोजित किया
नीति आयोग ने 10 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में शांति अधिनियम, 2025 को लागू करने पर हितधारक परामर्श आयोजित किया, जिसमें मसौदा नियम, FDI प्रावधान, वित्त, बीमा और विनिर्माण पर चर्चा हुई।
सारांश
नीति आयोग ने 10 जुलाई 2026 को डॉ. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र, नई दिल्ली में शांति अधिनियम, 2025 के कार्यान्वयन पर हितधारक परामर्श आयोजित किया, जिसकी अध्यक्षता नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर ने की। चर्चा तीन स्तंभों पर हुई: विधायी और नियामक ढांचा (मसौदा नियम, विनियम और FDI प्रावधान); वित्त, बीमा और जन धारणा; तथा विनिर्माण, संचालन और क्षमता निर्माण। पृष्ठभूमि: सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ़ न्यूक्लियर एनर्जी फ़ॉर ट्रांसफ़ॉर्मिंग इंडिया (शांति) अधिनियम, 2025 को 20 दिसंबर 2025 को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली (अधिनियम सं. 39, 2025); यह परमाणु ऊर्जा में सीमित निजी भागीदारी की अनुमति देता है और परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड को वैधानिक मान्यता देता है।
मुख्य तथ्य
- कार्यक्रम
- 10 जुलाई 2026, नई दिल्ली
- अध्यक्ष
- प्रो. अभय करंदीकर
- स्वीकृति
- 20 दिसंबर 2025; अधिनियम सं. 39, 2025
- विशेषताएँ
- सीमित निजी भागीदारी; AERB को वैधानिक मान्यता
- लक्ष्य
- 2047 तक 100 GW परमाणु क्षमता
अभ्यास MCQ 3 प्रश्न
10 जुलाई 2026 को शांति अधिनियम, 2025 के कार्यान्वयन पर नीति आयोग के हितधारक परामर्श की अध्यक्षता किसने की?
उत्तर देखें
सही उत्तर: A — प्रो. अभय करंदीकर
परामर्श की अध्यक्षता नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर ने की।
शांति अधिनियम, 2025 किस क्षेत्र से संबंधित है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: C — परमाणु ऊर्जा
SHANTI का अर्थ Sustainable Harnessing and Advancement of Nuclear Energy for Transforming India है; अधिनियम परमाणु ऊर्जा और आयनकारी विकिरण से संबंधित है।
शांति अधिनियम, 2025 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इसे 20 दिसंबर 2025 को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली। 2. यह परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) को वैधानिक मान्यता देता है। 3. यह नियामक निगरानी में परमाणु क्षेत्र में सीमित निजी भागीदारी की अनुमति देता है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?
उत्तर देखें
सही उत्तर: D — 1, 2 और 3
तीनों सही हैं: अधिनियम को 20 दिसंबर 2025 को स्वीकृति मिली (अधिनियम सं. 39, 2025), यह AERB को वैधानिक मान्यता देता है और नियामक निगरानी में सीमित निजी भागीदारी की अनुमति देता है।