कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय ने कंपनी अधिनियम की धारा 233 के तहत फास्ट-ट्रैक विलय का दायरा बढ़ाया
कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय ने 4 सितंबर 2025 की अधिसूचना से समझौता, व्यवस्था और समामेलन नियमों में संशोधन कर अधिक श्रेणियों की कंपनियों को कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 233 के तहत फास्ट-ट्रैक विलय मार्ग की सुविधा दी।
सारांश
कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय ने 4 सितंबर 2025 को अधिसूचित (GSR 603(E)) कंपनी (समझौता, व्यवस्था और समामेलन) नियमों में संशोधन के माध्यम से फास्ट-ट्रैक विलय का दायरा बढ़ाया। कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 233 दो या अधिक छोटी कंपनियों के बीच तथा होल्डिंग कंपनी और उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी के बीच केंद्र सरकार (क्षेत्रीय निदेशकों को प्रत्यायोजित) की मंज़ूरी से विलय की अनुमति देती है, और केंद्र को नियमों द्वारा अतिरिक्त श्रेणियाँ निर्धारित करने का अधिकार देती है। संशोधन में निर्धारित ऋण और जमा सीमाओं के भीतर असूचीबद्ध कंपनियाँ, होल्डिंग कंपनी और उसकी सहायक कंपनियाँ जहाँ अंतरणकर्ता सूचीबद्ध नहीं है, तथा एक ही होल्डिंग कंपनी की सहायक कंपनियाँ जहाँ अंतरणकर्ता सूचीबद्ध नहीं है, जोड़ी गई हैं। मंत्रालय ने कहा कि इसका उद्देश्य कारोबार में सुगमता बढ़ाना है। मंत्रालय ने 11 सितंबर को इसकी घोषणा की।
मुख्य तथ्य
- अधिसूचना
- 4 सितंबर 2025 (GSR 603(E)); घोषणा 11 सितंबर
- कानून
- धारा 233, कंपनी अधिनियम, 2013 (फास्ट-ट्रैक विलय)
- मंज़ूरी प्राधिकारी
- केंद्र सरकार, क्षेत्रीय निदेशकों को प्रत्यायोजित
- मौजूदा श्रेणियाँ
- छोटी कंपनियाँ; होल्डिंग कंपनी और पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक
- नई श्रेणियाँ
- ऋण/जमा सीमा के भीतर असूचीबद्ध कंपनियाँ; अंतरणकर्ता असूचीबद्ध होने पर होल्डिंग–सहायक और सहोदर सहायक कंपनियाँ
अभ्यास MCQ 3 प्रश्न
सितंबर 2025 में कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय द्वारा जिनका दायरा बढ़ाया गया, वे फास्ट-ट्रैक विलय कंपनी अधिनियम, 2013 की किस धारा के तहत होते हैं?
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सही उत्तर: C — धारा 233
कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 233 केंद्र सरकार की मंज़ूरी से फास्ट-ट्रैक विलय का प्रावधान करती है।
कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 233 के तहत फास्ट-ट्रैक विलय को मंज़ूरी देने की केंद्र सरकार की शक्ति किसे प्रत्यायोजित है?
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सही उत्तर: A — क्षेत्रीय निदेशक
विज्ञप्ति के अनुसार फास्ट-ट्रैक विलय केंद्र सरकार द्वारा मंज़ूर होते हैं, जो क्षेत्रीय निदेशकों को प्रत्यायोजित है।
फास्ट-ट्रैक विलय का दायरा बढ़ाने वाले सितंबर 2025 के संशोधन के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संशोधन से पहले भी धारा 233 दो या अधिक छोटी कंपनियों के विलय की अनुमति देती थी। 2. संशोधन एक ही होल्डिंग कंपनी की सहायक कंपनियों के फास्ट-ट्रैक विलय की अनुमति देता है, भले ही अंतरणकर्ता कंपनी सूचीबद्ध हो। उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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सही उत्तर: A — केवल 1
धारा 233(1) पहले से छोटी कंपनियों और होल्डिंग–पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी के विलय को कवर करती थी। सहोदर सहायक कंपनियों की नई श्रेणी केवल तब लागू है जब अंतरणकर्ता कंपनी सूचीबद्ध न हो, अतः कथन 2 गलत है।