आईएनएसटी मोहाली ने पार्किंसन रोग के लिए लक्षित नैनो-फ़ॉर्मूलेशन विकसित किया
पीआईबी के 27 जनवरी 2025 के अनुसार नैनो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, मोहाली के वैज्ञानिकों ने पार्किंसन रोग के लिए 17β-एस्ट्राडियोल हार्मोन को मस्तिष्क तक धीरे-धीरे पहुँचाने वाला लक्षित नैनो-फ़ॉर्मूलेशन विकसित किया।
सारांश
नैनो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएनएसटी), मोहाली, पंजाब स्थित विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के स्वायत्त संस्थान, के वैज्ञानिकों ने पार्किंसन रोग के लिए लक्षित नैनो-फ़ॉर्मूलेशन विकसित किया, जैसा पीआईबी ने 27 जनवरी 2025 को बताया। आईएनएसटी मोहाली ने हार्मोन को मस्तिष्क तक लगातार पहुँचाने के लिए डोपामाइन रिसेप्टर D3 से जुड़े, 17β-एस्ट्राडियोल युक्त काइटोसन नैनोकणों का उपयोग किया। कृंतक मॉडल में फ़ॉर्मूलेशन ने न्यूरॉन्स को माइटोकॉन्ड्रियल क्षति से बचाया और पहली बार दिखाया कि BMI1 कैलपेन का सब्सट्रेट है।
मुख्य तथ्य
- सूचना
- 27 जनवरी 2025 (पीआईबी)
- संस्थान
- आईएनएसटी मोहाली (डीएसटी का स्वायत्त संस्थान)
- रोग
- पार्किंसन रोग
- हार्मोन
- 17β-एस्ट्राडियोल (E2)
- वाहक
- डोपामाइन रिसेप्टर D3 से जुड़े काइटोसन नैनोकण
- खोज
- BMI1 कैलपेन का सब्सट्रेट
- परीक्षण
- कृंतक मॉडल
अभ्यास MCQ 2 प्रश्न
पार्किंसन रोग के लिए आईएनएसटी मोहाली का नैनो-फ़ॉर्मूलेशन मस्तिष्क तक किस हार्मोन को लगातार पहुँचाता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: C — 17β-एस्ट्राडियोल
PIB 2096694: लक्षित नैनो-फ़ॉर्मूलेशन 17β-एस्ट्राडियोल (E2) को मस्तिष्क तक लगातार पहुँचाता है।
आईएनएसटी मोहाली के पार्किंसन नैनो-फ़ॉर्मूलेशन में वाहक के रूप में कौन-से नैनोकण इस्तेमाल हुए?
उत्तर देखें
सही उत्तर: B — काइटोसन नैनोकण
PIB 2096694: डोपामाइन रिसेप्टर D3 को 17β-एस्ट्राडियोल युक्त काइटोसन नैनोकणों से जोड़ा गया।