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गुजरात विधानसभा ने समान नागरिक संहिता विधेयक पारित किया, उत्तराखंड के बाद दूसरा राज्य

24 मार्च 2026 को गुजरात विधानसभा ने सात घंटे से अधिक की बहस के बाद बहुमत के ध्वनिमत से गुजरात समान नागरिक संहिता विधेयक पारित किया; इसके साथ गुजरात UCC विधेयक पारित करने वाला उत्तराखंड के बाद दूसरा राज्य बना।

सारांश

गुजरात विधानसभा ने 24 मार्च 2026 को गुजरात समान नागरिक संहिता विधेयक पारित किया, जो धर्म से परे विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों के लिए एक समान कानूनी ढांचा देता है। सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रंजना देसाई की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट के बाद मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल द्वारा पेश यह विधेयक सात घंटे से अधिक की बहस के बाद बहुमत के ध्वनिमत से पारित हुआ, जबकि कांग्रेस ने इसे प्रवर समिति को भेजने की मांग करते हुए वॉकआउट किया। गुजरात UCC विधेयक पारित करने वाला उत्तराखंड के बाद दूसरा राज्य है। विधेयक विवाह और लिव-इन संबंधों का पंजीकरण अनिवार्य करता है, द्विविवाह और बल, दबाव या धोखे से किए गए विवाह के लिए 7 वर्ष तक की जेल का प्रावधान करता है तथा अनुसूचित जनजाति आबादी को छूट देता है।

मुख्य तथ्य

पारित
24 मार्च 2026, गुजरात विधानसभा, बहुमत ध्वनिमत
स्थान
उत्तराखंड (फरवरी 2024) के बाद UCC विधेयक पारित करने वाला दूसरा राज्य
दायरा
विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, लिव-इन संबंध – धर्म से परे
आधार
न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रंजना देसाई की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट
मुख्य प्रावधान
विवाह और लिव-इन संबंधों का अनिवार्य पंजीकरण; द्विविवाह या जबरन/धोखे से विवाह पर 7 वर्ष तक जेल
छूट
अनुसूचित जनजातियां

अभ्यास MCQ 3 प्रश्न

Q1

मार्च 2026 में उत्तराखंड के बाद समान नागरिक संहिता विधेयक पारित करने वाला दूसरा राज्य कौन-सा बना?

उत्तर देखें

सही उत्तर: B — गुजरात

गुजरात विधानसभा ने 24 मार्च 2026 को गुजरात समान नागरिक संहिता विधेयक पारित किया। उत्तराखंड फरवरी 2024 में पहला राज्य था।

Q2 उन्नत

गुजरात UCC विधेयक (2026) किसकी अध्यक्षता वाली विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट के बाद लाया गया?

उत्तर देखें

सही उत्तर: D — न्यायमूर्ति रंजना देसाई

सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रंजना देसाई की अध्यक्षता वाली समिति ने रिपोर्ट सौंपी, जिसके बाद मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने विधेयक पेश किया।

Q3 उन्नत

मार्च 2026 में पारित गुजरात समान नागरिक संहिता विधेयक के बारे में विचार कीजिए: 1. यह लिव-इन संबंधों का पंजीकरण अनिवार्य करता है। 2. यह अनुसूचित जनजाति आबादी सहित गुजरात के सभी निवासियों पर लागू है। 3. द्विविवाह पर 7 वर्ष तक के कारावास का प्रावधान है। उपरोक्त में से कौन-सा/से सही है/हैं?

उत्तर देखें

सही उत्तर: B — केवल 1 और 3

विधेयक अनुसूचित जनजाति आबादी को छूट देता है, इसलिए कथन 2 गलत है; यह लिव-इन संबंधों का पंजीकरण अनिवार्य करता है और द्विविवाह पर 7 वर्ष तक जेल का प्रावधान करता है।

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