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मसौदा नियमों में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर 'मूल देश' फिल्टर अनिवार्य करने का प्रस्ताव

उपभोक्ता मामले विभाग ने 10 नवंबर 2025 को विधिक माप विज्ञान (पैकबंद वस्तुएं) (द्वितीय) संशोधन नियम, 2025 का मसौदा जारी किया, जिसमें आयातित उत्पाद बेचने वाले ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के लिए खोजने और छांटने योग्य 'मूल देश' फिल्टर देना अनिवार्य करने का प्रस्ताव है।

सारांश

मूल देश संबंधी प्रस्ताव विधिक माप विज्ञान (पैकबंद वस्तुएं) नियम, 2011 के नियम 6(10) में एक परंतुक जोड़ेगा, जिसके तहत आयातित उत्पाद बेचने वाली हर ई-कॉमर्स इकाई को अपनी लिस्टिंग के साथ मूल देश का खोजने और छांटने योग्य फिल्टर देना होगा। विभाग ने कहा कि इससे उपभोक्ता सोच-समझकर खरीदारी कर सकेंगे और यह आत्मनिर्भर भारत व 'वोकल फॉर लोकल' का समर्थन करता है। 22 नवंबर 2025 तक सुझाव मांगे गए।

मुख्य तथ्य

मसौदा
विधिक माप विज्ञान (पैकबंद वस्तुएं) (द्वितीय) संशोधन नियम, 2025
जारीकर्ता
उपभोक्ता मामले विभाग
प्रस्ताव
खोजने व छांटने योग्य 'मूल देश' फिल्टर
लागू
आयातित उत्पाद बेचने वाली ई-कॉमर्स इकाइयां
संशोधित नियम
नियम 6(10), पैकबंद वस्तुएं नियम 2011
सुझाव की तिथि
22 नवंबर 2025

अभ्यास MCQ 2 प्रश्न

Q1 उन्नत

ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के लिए प्रस्तावित अनिवार्य 'मूल देश' फिल्टर किन नियमों में संशोधन करके लाया जाना है?

उत्तर देखें

सही उत्तर: C — विधिक माप विज्ञान (पैकबंद वस्तुएं) नियम, 2011

मसौदा विधिक माप विज्ञान (पैकबंद वस्तुएं) नियम, 2011 के नियम 6(10) में संशोधन करता है।

Q2 उन्नत

नवंबर 2025 के 'मूल देश' फिल्टर संबंधी मसौदा नियमों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. आयातित उत्पाद बेचने वाली हर ई-कॉमर्स इकाई को यह फिल्टर देना होगा। 2. मसौदा वाणिज्य विभाग ने जारी किया। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

उत्तर देखें

सही उत्तर: A — केवल 1

परंतुक आयातित उत्पाद बेचने वाली हर ई-कॉमर्स इकाई पर लागू है। मसौदा वाणिज्य विभाग ने नहीं, उपभोक्ता मामले विभाग ने जारी किया।

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