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ICAR-CISH–APEDA प्रोटोकॉल से अमरोहा के दशहरी और लंगड़ा आम समुद्री मार्ग से दुबई पहुँचे

अमरोहा, उत्तर प्रदेश से दशहरी और लंगड़ा आम की 12.5 टन की खेप ICAR-CISH और APEDA द्वारा विकसित समुद्री मार्ग प्रोटोकॉल के तहत 17 जुलाई 2026 को दुबई पहुँची।

सारांश

अमरोहा, उत्तर प्रदेश से निर्यात की गई दशहरी और लंगड़ा आम की 12.5 टन की खेप 40 फुट के रीफर कंटेनर में समुद्री मार्ग से 17 जुलाई 2026 को दुबई पहुँची, जिसके लिए आईसीएआर–केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (ICAR-CISH), लखनऊ और APEDA द्वारा विकसित समुद्री मार्ग निर्यात प्रोटोकॉल अपनाया गया। 22 जून 2026 को तोड़े गए और ICAR-CISH के METWASH से उपचारित आमों को पश्चिमी विक्षोभ के कारण हुई देरी से 25 दिन लगे, फिर भी लगभग 90% आम अच्छी विपणन योग्य स्थिति में पहुँचे। कृषि मंत्रालय के अनुसार किसानों को पारंपरिक माध्यमों की तुलना में लगभग ₹15–20 प्रति किलो अधिक आय हुई।

मुख्य तथ्य

दुबई पहुँच
17 जुलाई 2026
मात्रा
12.5 टन
उद्गम
अमरोहा, उत्तर प्रदेश
प्रोटोकॉल
ICAR-CISH लखनऊ और APEDA
गुणवत्ता
लगभग 90% विपणन योग्य

अभ्यास MCQ 3 प्रश्न

Q1

17 जुलाई 2026 को दुबई पहुँची दशहरी और लंगड़ा आम की 12.5 टन की समुद्री खेप उत्तर प्रदेश के किस ज़िले से निर्यात की गई थी?

उत्तर देखें

सही उत्तर: B — अमरोहा

यह खेप अमरोहा, उत्तर प्रदेश से निर्यात की गई थी।

Q2 उन्नत

अमरोहा–दुबई खेप के लिए प्रयुक्त समुद्री मार्ग आम निर्यात प्रोटोकॉल APEDA और किस संस्थान ने मिलकर विकसित किया?

उत्तर देखें

सही उत्तर: D — ICAR-CISH, लखनऊ

प्रोटोकॉल आईसीएआर–केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (ICAR-CISH), लखनऊ और APEDA ने मिलकर विकसित किया।

Q3 उन्नत

अमरोहा–दुबई आम समुद्री खेप के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. आम 22 जून 2026 को तोड़े गए और 17 जुलाई 2026 को दुबई पहुँचे। 2. लगभग 90% आम अच्छी विपणन योग्य स्थिति में पहुँचे। 3. समुद्री मार्ग छोड़कर खेप को हवाई मार्ग से दुबई भेजा गया। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

उत्तर देखें

सही उत्तर: C — केवल 1 और 2

कथन 1 और 2 सही हैं। कथन 3 गलत है: खेप पूरे रास्ते 40 फुट के रीफर कंटेनर में समुद्री मार्ग से गई।

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