CJI ने न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा पर लगे आरोपों की जाँच के लिए तीन सदस्यीय आंतरिक समिति गठित की
भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने 22 मार्च 2025 को दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा पर लगे आरोपों की जाँच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की, और सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की रिपोर्ट सार्वजनिक की।
सारांश
सर्वोच्च न्यायालय ने 22 मार्च 2025 को बताया कि भारत के मुख्य न्यायाधीश ने दिल्ली उच्च न्यायालय के कार्यरत न्यायाधीश न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के सरकारी आवास पर आग के दौरान कथित रूप से नकदी मिलने के आरोपों की जाँच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की है। इसके सदस्य हैं: पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति शील नागू, हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी.एस. संधावालिया और कर्नाटक उच्च न्यायालय की न्यायाधीश न्यायमूर्ति अनु शिवरामन। दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से फ़िलहाल न्यायमूर्ति वर्मा को कोई न्यायिक कार्य न सौंपने को कहा गया। एक असामान्य कदम में सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की 21 और 22 मार्च की रिपोर्ट, न्यायमूर्ति वर्मा का जवाब, तस्वीरें और वीडियो कुछ अंश हटाकर अपलोड किए।
मुख्य तथ्य
- तिथि
- 22 मार्च 2025
- गठन
- CJI संजीव खन्ना
- सदस्य
- न्यायमूर्ति शील नागू, जी.एस. संधावालिया, अनु शिवरामन
- संबंधित न्यायाधीश
- न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा, दिल्ली उच्च न्यायालय
- अंतरिम कदम
- न्यायमूर्ति वर्मा को कोई न्यायिक कार्य नहीं
- सार्वजनिक
- दिल्ली HC CJ की 21 और 22 मार्च की रिपोर्ट, जवाब, तस्वीरें, वीडियो
अभ्यास MCQ 4 प्रश्न
22 मार्च 2025 को न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा पर लगे आरोपों की जाँच के लिए तीन सदस्यीय समिति किसने गठित की?
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सही उत्तर: D — भारत के मुख्य न्यायाधीश
सर्वोच्च न्यायालय की 22 मार्च 2025 की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने आंतरिक समिति गठित की।
22 मार्च 2025 को न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा पर आरोपों की जाँच के लिए गठित आंतरिक समिति में निम्नलिखित में से कौन सदस्य नहीं था?
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सही उत्तर: D — न्यायमूर्ति डी.के. उपाध्याय
सदस्य न्यायमूर्ति शील नागू, जी.एस. संधावालिया और अनु शिवरामन थे। दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी.के. उपाध्याय ने प्रारंभिक रिपोर्ट दी थी।
22 मार्च 2025 को सर्वोच्च न्यायालय ने न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के संबंध में कौन-सा अंतरिम कदम घोषित किया?
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सही उत्तर: A — दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से उन्हें कोई न्यायिक कार्य न सौंपने को कहा गया
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से फ़िलहाल न्यायमूर्ति वर्मा को कोई न्यायिक कार्य न सौंपने को कहा गया।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा पर आरोपों की जाँच के लिए 22 मार्च 2025 को गठित आंतरिक समिति में उच्च न्यायालयों के दो मुख्य न्यायाधीश और उच्च न्यायालय का एक न्यायाधीश था। 2. उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को केवल अनुच्छेद 217(1)(b) के तहत, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के लिए अनुच्छेद 124(4) में दी गई रीति से ही पद से हटाया जा सकता है। उपरोक्त में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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सही उत्तर: C — 1 और 2 दोनों
समिति में दो मुख्य न्यायाधीश (पंजाब एवं हरियाणा और हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय) और एक न्यायाधीश (कर्नाटक उच्च न्यायालय) थे। अनुच्छेद 217(1)(b) के तहत राष्ट्रपति उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को अनुच्छेद 124(4) में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के लिए दी गई रीति से हटा सकते हैं।