कैबिनेट ने ₹1,800 करोड़ के साथ IVFRT योजना मार्च 2031 तक बढ़ाई
25 मार्च 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आप्रवासन, वीज़ा, विदेशी पंजीकरण और ट्रैकिंग (IVFRT) योजना को ₹1,800 करोड़ के परिव्यय के साथ 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक पांच वर्ष जारी रखने को मंज़ूरी दी।
सारांश
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 25 मार्च 2026 को आप्रवासन, वीज़ा, विदेशी पंजीकरण और ट्रैकिंग (IVFRT) योजना को 31 मार्च 2026 के बाद पांच वर्ष, यानी 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक, ₹1,800 करोड़ के बजट परिव्यय के साथ जारी रखने को मंज़ूरी दी। IVFRT आप्रवासन, वीज़ा जारी करने और विदेशियों के पंजीकरण को आपस में जोड़ती है। इसे पहली बार 13 मई 2010 को आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने मंज़ूरी दी थी और पिछले विस्तार (2021-26) का परिव्यय ₹1,365 करोड़ था। सरकार ने कहा कि आप्रवासन और विदेशियों विषयक अधिनियम, 2025 के बाद IVFRT का आधुनिकीकरण अनिवार्य हो गया है।
मुख्य तथ्य
- अवधि
- 1 अप्रैल 2026 – 31 मार्च 2031
- परिव्यय
- ₹1,800 करोड़
- दायरा
- आप्रवासन, वीज़ा, विदेशियों का पंजीकरण और ट्रैकिंग
- पहली मंज़ूरी
- CCEA, 13 मई 2010
- पिछला चरण
- 2021-26, ₹1,365 करोड़
- संदर्भ
- आप्रवासन और विदेशियों विषयक अधिनियम, 2025
अभ्यास MCQ 2 प्रश्न
मार्च 2026 में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा बढ़ाई गई IVFRT योजना किससे संबंधित है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: D — आप्रवासन, वीज़ा और विदेशियों का पंजीकरण
IVFRT का अर्थ है आप्रवासन, वीज़ा, विदेशी पंजीकरण और ट्रैकिंग; इसे ₹1,800 करोड़ के साथ 31 मार्च 2031 तक बढ़ाया गया।
IVFRT योजना के बारे में विचार कीजिए: 1. 2026-2031 के लिए इसे जारी रखने का परिव्यय ₹1,800 करोड़ है। 2. इसे पहली बार 2010 में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने मंज़ूरी दी थी। उपरोक्त में से कौन-सा/से सही है/हैं?
उत्तर देखें
सही उत्तर: C — 1 और 2 दोनों
2026-31 के लिए परिव्यय ₹1,800 करोड़ है; CCEA ने परियोजना को पहली बार 13 मई 2010 को मंज़ूरी दी थी।