उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन श्रवणबेलगोला में आचार्य शांतिसागर शताब्दी समारोह में शामिल हुए
उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन 9 नवंबर 2025 को कर्नाटक के श्रवणबेलगोला में आचार्य श्री 108 शांतिसागर महाराज की 1925 की यात्रा के शताब्दी समारोह में शामिल हुए और आचार्य की प्रतिमा का अनावरण किया।
सारांश
आचार्य शांतिसागर महाराज 1925 में महामस्तकाभिषेक समारोह के लिए श्रवणबेलगोला आए थे, और उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने दिगंबर परंपरा को पुनर्जीवित करने में उनकी भूमिका तथा अहिंसा, अपरिग्रह और अनेकांतवाद के प्रतीक उनके जीवन की सराहना की। उपराष्ट्रपति ने श्रवणबेलगोला की 2,000 वर्ष पुरानी जैन विरासत और बाहुबली प्रतिमा का उल्लेख किया, वहां चंद्रगुप्त मौर्य के त्याग को याद किया, और प्राकृत को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने तथा ज्ञान भारतम मिशन के तहत पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण के लिए सरकार की सराहना की।
मुख्य तथ्य
- कार्यक्रम
- आचार्य शांतिसागर की 1925 की यात्रा की शताब्दी
- स्थान
- श्रवणबेलगोला, कर्नाटक
- मूल यात्रा
- 1925, महामस्तकाभिषेक के लिए
- अनावरण
- आचार्य शांतिसागर की प्रतिमा
- उल्लेख
- प्राकृत शास्त्रीय भाषा; ज्ञान भारतम मिशन
अभ्यास MCQ 2 प्रश्न
9 नवंबर 2025 को श्रवणबेलगोला में मनाई गई शताब्दी आचार्य शांतिसागर महाराज की 1925 में किस समारोह के लिए हुई यात्रा से जुड़ी थी?
उत्तर देखें
सही उत्तर: D — महामस्तकाभिषेक
यह कार्यक्रम आचार्य शांतिसागर महाराज की 1925 में महामस्तकाभिषेक समारोह के लिए श्रवणबेलगोला यात्रा की शताब्दी थी।
नवंबर 2025 में श्रवणबेलगोला में उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने किस भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने के लिए सरकार की सराहना की?
उत्तर देखें
सही उत्तर: C — प्राकृत
उपराष्ट्रपति ने प्राकृत को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने और ज्ञान भारतम मिशन के तहत पांडुलिपि डिजिटलीकरण की सराहना की।