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पंडवानी की दिग्गज तीजन बाई का AIIMS रायपुर में निधन

छत्तीसगढ़ की पंडवानी (महाभारत की लोक-गायन कथा) की सबसे प्रमुख कलाकार और पद्म विभूषण से सम्मानित तीजन बाई का 5 जुलाई 2026 को लंबी बीमारी के बाद AIIMS रायपुर में निधन हो गया।

सारांश

पंडवानी गायिका तीजन बाई का 5 जुलाई 2026 की तड़के लंबी बीमारी के बाद अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), रायपुर में निधन हो गया; अस्पताल ने सुबह 3.15 बजे उन्हें मृत घोषित किया। उन्हें 27 मई को भर्ती कराया गया था। पंडवानी छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोक कला है जिसमें महाभारत के प्रसंगों का संगीतमय वाचन होता है; यह परंपरागत रूप से पुरुषों की कला थी और तीजन बाई इसे भारत और दुनिया भर के दर्शकों तक ले गईं। उन्हें पद्म श्री, पद्म भूषण और 2019 में पद्म विभूषण मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि उन्होंने छत्तीसगढ़ की लोक कला को दुनिया भर में विशिष्ट पहचान दिलाई, और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने उनके निधन को अपूरणीय क्षति बताया।

मुख्य तथ्य

निधन
5 जुलाई 2026, AIIMS रायपुर
कला
पंडवानी: महाभारत का संगीतमय वाचन, छत्तीसगढ़
सम्मान
पद्म श्री, पद्म भूषण, पद्म विभूषण (2019)

अभ्यास MCQ 4 प्रश्न

Q1

5 जुलाई 2026 को दिवंगत तीजन बाई पंडवानी की सबसे प्रसिद्ध कलाकार थीं। पंडवानी किस महाकाव्य के प्रसंगों का वाचन है?

उत्तर देखें

सही उत्तर: A — महाभारत

पंडवानी महाभारत के प्रसंगों का छत्तीसगढ़ी पारंपरिक संगीतमय वाचन है।

Q2

तीजन बाई द्वारा दुनिया तक पहुँचाई गई लोक कला पंडवानी किस राज्य की है?

उत्तर देखें

सही उत्तर: C — छत्तीसगढ़

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि तीजन बाई ने छत्तीसगढ़ की पंडवानी लोक कला को दुनिया भर में विशिष्ट पहचान दिलाई।

Q3 उन्नत

तीजन बाई को पद्म विभूषण किस वर्ष प्रदान किया गया?

उत्तर देखें

सही उत्तर: D — 2019

25 जनवरी 2019 के गृह मंत्रालय के प्रेस नोट में 2019 के चार पद्म विभूषण पुरस्कार विजेताओं में सुश्री तीजन बाई (कला-गायन-लोक, छत्तीसगढ़) का नाम पहले स्थान पर है।

Q4 उन्नत

तीजन बाई के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. उनका निधन 5 जुलाई 2026 को AIIMS रायपुर में हुआ। 2. उनकी कला पंडवानी रामायण के प्रसंगों का वाचन है। 3. वे पद्म विभूषण से सम्मानित थीं। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

उत्तर देखें

सही उत्तर: B — केवल 1 और 3

उनका निधन 5 जुलाई 2026 को AIIMS रायपुर में हुआ और वे पद्म विभूषण से सम्मानित थीं; पंडवानी महाभारत का वाचन है, रामायण का नहीं।

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