तमिलनाडु राज्य बनाम तमिलनाडु के राज्यपाल मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 200 के तहत समय-सीमा तय की; दस विधेयक स्वीकृत माने गए
8 अप्रैल 2025 को न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और आर. महादेवन की पीठ ने दोबारा पारित दस तमिलनाडु विधेयकों को राष्ट्रपति के लिए आरक्षित करने को अवैध ठहराया, अनुच्छेद 142 के तहत उन्हें स्वीकृत माना और राज्यपालों व राष्ट्रपति के लिए समय-सीमा तय की।
सारांश
तमिलनाडु राज्य बनाम तमिलनाडु के राज्यपाल (W.P.(C) No. 1239 of 2023; 2025 INSC 481) मामले में 8 अप्रैल 2025 को न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और आर. महादेवन की पीठ ने राज्य विधानमंडल द्वारा पारित विधेयकों पर राज्यपाल की कार्रवाई की जाँच की। फ़ैसले के अनुसार 13 नवंबर 2023 को राज्यपाल ने दस विधेयकों पर स्वीकृति रोकी; विधानसभा ने 18 नवंबर 2023 को विशेष सत्र में उन्हें फिर पारित किया; और 28 नवंबर 2023 को राज्यपाल ने उन्हें राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित कर दिया। न्यायालय ने कहा कि सामान्य नियम के रूप में अनुच्छेद 200 के पहले परंतुक के तहत पुनर्विचार के बाद दोबारा प्रस्तुत विधेयक को राज्यपाल राष्ट्रपति के लिए आरक्षित नहीं कर सकते, और दस विधेयकों का आरक्षण अवैध व विधि की दृष्टि से त्रुटिपूर्ण था; इन पर राष्ट्रपति की बाद की कार्रवाई भी रद्द की गई। अनुच्छेद 142 का प्रयोग कर न्यायालय ने विधेयकों को उसी तिथि से स्वीकृत माना जिस दिन वे पुनर्विचार के बाद राज्यपाल को प्रस्तुत किए गए। अनुच्छेद 200 में कोई स्पष्ट समय-सीमा न होने का उल्लेख करते हुए न्यायालय ने समय-सीमा तय की: मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्रवाई अधिकतम एक माह में; सलाह के विरुद्ध स्वीकृति रोकने पर संदेश सहित विधेयक लौटाना तीन माह में; सलाह के विरुद्ध राष्ट्रपति के लिए आरक्षण तीन माह में; और दोबारा प्रस्तुत विधेयक पर स्वीकृति एक माह में। साथ ही अनुच्छेद 201 के तहत आरक्षित विधेयकों पर राष्ट्रपति को तीन माह में निर्णय लेना चाहिए और देरी के कारण दर्ज करने होंगे।
मुख्य तथ्य
- मामला
- W.P.(C) No. 1239 of 2023; 2025 INSC 481
- तिथि / पीठ
- 8 अप्रैल 2025; न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और आर. महादेवन
- विधेयक
- 10; 18 नवंबर 2023 को दोबारा पारित
- निर्णय
- दूसरे दौर में आरक्षण अवैध; अनुच्छेद 142 से स्वीकृत माने गए
- राज्यपाल समय-सीमा
- 1 माह / 3 माह
- राष्ट्रपति (अनु. 201)
- 3 माह
अभ्यास MCQ 4 प्रश्न
8 अप्रैल 2025 को तमिलनाडु राज्य बनाम तमिलनाडु के राज्यपाल मामले में सुप्रीम कोर्ट की किस पीठ ने फ़ैसला दिया?
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सही उत्तर: A — न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और आर. महादेवन
न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और आर. महादेवन; फ़ैसला न्यायमूर्ति पारदीवाला ने लिखा।
संविधान के किस अनुच्छेद के तहत सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के दस विधेयकों को स्वीकृत माना?
उत्तर देखें
सही उत्तर: B — अनुच्छेद 142
अनुच्छेद 142, जो न्यायालय को पूर्ण न्याय के लिए आवश्यक आदेश देने की शक्ति देता है।
तमिलनाडु राज्य बनाम तमिलनाडु के राज्यपाल (2025) में तय समय-सीमाओं के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यदि राज्यपाल राज्य मंत्रिपरिषद की सलाह के विरुद्ध स्वीकृति रोकते हैं, तो विधेयक को संदेश सहित अधिकतम तीन माह में लौटाना होगा। 2. अनुच्छेद 201 के तहत आरक्षित विधेयकों पर राष्ट्रपति को तीन माह में निर्णय लेना है और देरी के कारण दर्ज करने हैं। उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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सही उत्तर: C — 1 और 2 दोनों
दोनों सही हैं। सलाह के विरुद्ध स्वीकृति रोकने पर संदेश सहित विधेयक लौटाने के लिए तीन माह और अनुच्छेद 201 के तहत राष्ट्रपति के लिए तीन माह की अवधि तय हुई।
8 अप्रैल 2025 के फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट ने दोबारा पारित कितने विधेयकों को स्वीकृत माना?
उत्तर देखें
सही उत्तर: D — दस
दस; विधानसभा ने इन्हें 18 नवंबर 2023 को दोबारा पारित किया था और राज्यपाल ने 28 नवंबर 2023 को राष्ट्रपति के लिए आरक्षित किया।