सुप्रीम कोर्ट ने कविता पर सांसद इमरान प्रतापगढ़ी के ख़िलाफ़ गुजरात FIR रद्द की, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बरकरार
सुप्रीम कोर्ट ने 28 मार्च 2025 को राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी के ख़िलाफ़ जामनगर FIR रद्द करते हुए कहा कि कविता पढ़ना अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत संरक्षित अभिव्यक्ति है।
सारांश
सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति अभय एस. ओका और उज्ज्वल भुइयाँ की पीठ ने 28 मार्च 2025 को राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी के ख़िलाफ़ गुजरात पुलिस द्वारा जामनगर में दर्ज FIR रद्द कर दी, जो पृष्ठभूमि में 'ऐ ख़ून के प्यासे बात सुनो' कविता वाले सोशल मीडिया वीडियो पर थी। अदालत ने मामला रद्द करने से गुजरात उच्च न्यायालय के इनकार को पलट दिया और कहा कि भारतीय न्याय संहिता के तहत कोई अपराध नहीं बनता। अदालत ने कहा कि गणतंत्र के 75 वर्ष बाद कविता, कला या स्टैंड-अप कॉमेडी को वैमनस्य फैलाने वाला नहीं माना जा सकता और पुलिस को अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करना चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे भाषण संबंधी मामलों में FIR दर्ज करने से पहले पुलिस को BNSS की धारा 173(3) के तहत प्रारंभिक जाँच करनी चाहिए।
मुख्य तथ्य
- तारीख
- 28 मार्च 2025
- पीठ
- न्यायमूर्ति अभय एस. ओका और उज्ज्वल भुइयाँ
- मामला
- इमरान प्रतापगढ़ी बनाम गुजरात राज्य (2025 INSC 410)
- FIR
- जामनगर, गुजरात; रद्द
- कविता
- 'ऐ ख़ून के प्यासे बात सुनो'
- अधिकार
- अनुच्छेद 19(1)(a), वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
- प्रक्रिया
- BNSS की धारा 173(3) के तहत प्रारंभिक जाँच
अभ्यास MCQ 3 प्रश्न
28 मार्च 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया वीडियो में कविता को लेकर किस राज्यसभा सांसद के ख़िलाफ़ FIR रद्द की?
उत्तर देखें
सही उत्तर: A — इमरान प्रतापगढ़ी
सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस के राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी के ख़िलाफ़ जामनगर FIR रद्द की।
28 मार्च 2025 को इमरान प्रतापगढ़ी मामले का फ़ैसला सुप्रीम कोर्ट की किस पीठ ने किया?
उत्तर देखें
सही उत्तर: B — न्यायमूर्ति अभय एस. ओका और उज्ज्वल भुइयाँ
मामले का फ़ैसला न्यायमूर्ति अभय एस. ओका और उज्ज्वल भुइयाँ की पीठ ने किया।
इमरान प्रतापगढ़ी बनाम गुजरात राज्य (28 मार्च 2025) में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भरोसा किया। 2. अदालत ने ऐसे भाषण मामलों में FIR दर्ज करने से पहले भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 173(3) के तहत प्रारंभिक जाँच का उल्लेख किया। उपरोक्त में से कौन-सा/से सही है/हैं?
उत्तर देखें
सही उत्तर: C — 1 और 2 दोनों
दोनों सही हैं। अदालत ने फ़ैसले का आधार अनुच्छेद 19(1)(a) को बनाया और कहा कि ऐसे मामलों में पुलिस को BNSS की धारा 173(3) के तहत प्रारंभिक जाँच करनी चाहिए।