सुप्रीम कोर्ट: हिंदू धर्म से इस्लाम में धर्मांतरण से पिछड़ा वर्ग आरक्षण अपने-आप नहीं मिलता
15 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हिंदू धर्म से इस्लाम या अन्य गैर-हिंदू धर्म अपनाने वाला व्यक्ति अपने-आप पिछड़ा वर्ग आरक्षण का दावा नहीं कर सकता, और मद्रास हाई कोर्ट के फ़ैसले के विरुद्ध तमिलनाडु की अपील खारिज कर दी।
सारांश
सुप्रीम कोर्ट ने 15 अक्टूबर 2026 को फ़ैसला दिया कि पिछड़े वर्ग का कोई हिंदू केवल इस्लाम या किसी अन्य गैर-हिंदू धर्म में धर्मांतरण करके पिछड़ा वर्ग आरक्षण का दावा नहीं कर सकता। न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर की पीठ ने मद्रास हाई कोर्ट के फ़ैसले के विरुद्ध तमिलनाडु सरकार की अपील खारिज करते हुए कहा कि पूर्व जाति का सामाजिक पिछड़ापन धर्मांतरण के बाद आगे नहीं जाता। अदालत ने कहा कि अनुच्छेद 16(4) के लाभ केवल धर्मांतरण से पहले की स्थिति के आधार पर नहीं दिए जा सकते, और दोहराया कि हिंदू, सिख या बौद्ध के अलावा कोई अन्य धर्म मानने वाला व्यक्ति अनुसूचित जाति का दर्जा खो देता है।
मुख्य तथ्य
- न्यायालय
- भारत का सर्वोच्च न्यायालय, 15 अक्टूबर 2026
- पीठ
- न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर
- मामला
- मद्रास हाई कोर्ट के फ़ैसले के विरुद्ध तमिलनाडु सरकार की अपील – खारिज
- फ़ैसला
- गैर-हिंदू धर्म में धर्मांतरण से अपने-आप अधिसूचित पिछड़े वर्ग की सदस्यता नहीं मिलती
- संवैधानिक प्रावधान
- अनुच्छेद 16(4) के लाभ केवल धर्मांतरण-पूर्व स्थिति पर आधारित नहीं हो सकते
- अनुसूचित जाति दर्जा
- हिंदू, सिख या बौद्ध के अलावा अन्य धर्म मानने पर समाप्त
अभ्यास MCQ 2 प्रश्न
अक्टूबर 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने इस्लाम अपनाने वालों के आरक्षण लाभ पर किस राज्य सरकार की अपील खारिज की?
उत्तर देखें
सही उत्तर: D — तमिलनाडु
धर्मांतरण और पिछड़ा वर्ग आरक्षण पर अक्टूबर 2026 के फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किस अनुच्छेद के लाभ केवल धर्मांतरण-पूर्व स्थिति के आधार पर नहीं दिए जा सकते?
उत्तर देखें
सही उत्तर: A — अनुच्छेद 16(4)