स्टैंड-अप इंडिया के नौ वर्ष पूरे, 61,020 करोड़ रुपये स्वीकृत
वित्त मंत्रालय ने बताया कि स्टैंड-अप इंडिया योजना ने 5 अप्रैल 2025 को नौ वर्ष पूरे किए, और 17 मार्च 2025 तक कुल 61,020.41 करोड़ रुपये के ऋण स्वीकृत हुए।
सारांश
वित्त मंत्रालय ने बताया कि एससी, एसटी और महिला उद्यमियों को नए व्यवसाय के लिए बैंक ऋण देने हेतु 5 अप्रैल 2016 को शुरू की गई स्टैंड-अप इंडिया योजना ने 5 अप्रैल 2025 को नौ वर्ष पूरे किए। शुरुआत से स्वीकृत कुल राशि 31 अक्टूबर 2018 के 14,431.14 करोड़ रुपये से बढ़कर 17 मार्च 2025 तक 61,020.41 करोड़ रुपये हो गई। नवंबर 2018 से नवंबर 2024 के बीच एससी खाते 9,399 से बढ़कर 46,248 हुए और ऋण 9,747.11 करोड़ रुपये तक पहुँचे; एसटी खाते 2,841 से बढ़कर 15,228 हुए और ऋण 3,244.07 करोड़ रुपये रहे; और महिला उद्यमियों के खाते 55,644 से बढ़कर 1,90,844 हुए, जिनकी स्वीकृत राशि 43,984.10 करोड़ रुपये रही।
मुख्य तथ्य
- शुरुआत
- 5 अप्रैल 2016
- लाभार्थी
- एससी, एसटी और महिला उद्यमी, नए व्यवसाय के लिए
- कुल स्वीकृत
- 17 मार्च 2025 तक 61,020.41 करोड़ रुपये
- महिला खाते
- नवंबर 2024 तक 1,90,844; 43,984.10 करोड़ रुपये
- एससी खाते
- 46,248; 9,747.11 करोड़ रुपये
- एसटी खाते
- 15,228; 3,244.07 करोड़ रुपये
अभ्यास MCQ 3 प्रश्न
स्टैंड-अप इंडिया योजना किस वर्ष शुरू की गई थी?
उत्तर देखें
सही उत्तर: B — 2016
पीआईबी (वित्त मंत्रालय): स्टैंड-अप इंडिया योजना 5 अप्रैल 2016 को शुरू की गई थी।
वित्त मंत्रालय के अनुसार 17 मार्च 2025 तक स्टैंड-अप इंडिया के तहत शुरुआत से कुल कितनी राशि स्वीकृत हुई?
उत्तर देखें
सही उत्तर: C — 61,020.41 करोड़ रुपये
पीआईबी (वित्त मंत्रालय): कुल स्वीकृत राशि 14,431.14 करोड़ रुपये (31 अक्टूबर 2018) से बढ़कर 17 मार्च 2025 तक 61,020.41 करोड़ रुपये हो गई।
स्टैंड-अप इंडिया योजना के बारे में निम्नलिखित पर विचार कीजिए: 1. यह एससी, एसटी और महिला उद्यमियों को नया व्यवसाय शुरू करने के लिए बैंक ऋण देती है। 2. इसके तहत महिला उद्यमियों के खाते नवंबर 2024 तक 1.9 लाख से अधिक हो गए। 3. इसके तहत कुल स्वीकृतियाँ मार्च 2025 तक 1 लाख करोड़ रुपये पार कर गईं। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
उत्तर देखें
सही उत्तर: A — केवल 1 और 2
पीआईबी (वित्त मंत्रालय): योजना एससी, एसटी और महिला उद्यमियों को नए व्यवसाय के लिए बैंक ऋण देती है, और नवंबर 2024 तक महिलाओं के खाते 1,90,844 हो गए। 17 मार्च 2025 तक कुल स्वीकृतियाँ 61,020.41 करोड़ रुपये थीं, इसलिए कथन 3 गलत है।