गजेंद्र सिंह शेखावत ने मौखिक पाठ परंपरा को पुनर्जीवित करने के लिए श्रीरंगम में कंब रामायण पारायणम का उद्घाटन किया
केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने 18 मार्च 2025 को तिरुचिरापल्ली के श्रीरंगम में कंब रामायण पारायणम का उद्घाटन किया, जिससे तमिल महाकाव्य के मौखिक पाठ की परंपरा को पुनर्जीवित करने की दक्षिण क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र की पहल शुरू हुई।
सारांश
केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने 18 मार्च 2025 को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली के श्रीरंगम में सिंगर कोविल सभागार में कंब रामायण पारायणम का उद्घाटन किया। संस्कृति मंत्रालय के अधीन दक्षिण क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (SZCC), तंजावुर के इस कार्यक्रम का उद्देश्य स्थानीय मंडलियों द्वारा कंब रामायण पाठ की घटती मौखिक परंपरा को पुनर्जीवित करना है। इसके बाद 20 से 29 मार्च तक तिरुपुल्लंबुतंगुडी, मदुरांतकम, तिरुनीरमलै और वडुवूर सहित राज्य भर के मंदिरों में पाठ होने थे, और 30 मार्च से 6 अप्रैल (राम नवमी) तक कवि कंबर के जन्मस्थान तेरझुंदूर के कंबर मेडु में उत्सव होना था।
मुख्य तथ्य
- तिथि
- 18 मार्च 2025
- स्थान
- सिंगर कोविल सभागार, श्रीरंगम, तिरुचिरापल्ली
- द्वारा
- गजेंद्र सिंह शेखावत
- आयोजक
- दक्षिण क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, तंजावुर
- चरण II
- कंबर मेडु, तेरझुंदूर, 30 मार्च–6 अप्रैल 2025
- उद्देश्य
- मंडलियों की मौखिक पाठ परंपरा को पुनर्जीवित करना
अभ्यास MCQ 3 प्रश्न
केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने 18 मार्च 2025 को कंब रामायण पारायणम का उद्घाटन कहाँ किया?
उत्तर देखें
सही उत्तर: D — श्रीरंगम, तिरुचिरापल्ली
शेखावत ने तिरुचिरापल्ली के श्रीरंगम में सिंगर कोविल सभागार में कंब रामायण पारायणम का उद्घाटन किया।
तमिलनाडु में कंब रामायण की मौखिक पाठ परंपरा को पुनर्जीवित करने की 2025 की पहल संस्कृति मंत्रालय के किस निकाय ने आयोजित की?
उत्तर देखें
सही उत्तर: A — दक्षिण क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, तंजावुर
यह पहल संस्कृति मंत्रालय के अधीन दक्षिण क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (SZCC), तंजावुर की है।
30 मार्च से 6 अप्रैल 2025 तक कंब रामायण उत्सव का स्थल और कवि कंबर का जन्मस्थान कंबर मेडु तमिलनाडु में किस स्थान पर है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: B — तेरझुंदूर
सप्ताह भर का उत्सव तेरझुंदूर में कंबर के जन्मस्थान कंबर मेडु में हुआ। मदुरांतकम, वडुवूर और तिरुनीरमलै उन मंदिरों में थे जहाँ पाठ हुए।