राष्ट्रपति ने राष्ट्रपति के अंगरक्षक को हीरक जयंती रजत तुरही भेंट की
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 30 सितंबर 2025 को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति के अंगरक्षक (PBG) को हीरक जयंती रजत तुरही और तुरही ध्वज भेंट किया, जो 1950 में PBG नाम मिलने के 75 वर्ष पूरे होने का प्रतीक है।
सारांश
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 30 सितंबर 2025 को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति के अंगरक्षक (PBG) को हीरक जयंती रजत तुरही और तुरही ध्वज भेंट किया, जो 1950 में इस रेजिमेंट को PBG नाम मिलने के 75 वर्ष पूरे होने पर दिया गया। PBG भारतीय सेना की सबसे पुरानी रेजिमेंट है, जिसका गठन 1773 में गवर्नर-जनरल के अंगरक्षक (बाद में वायसराय के अंगरक्षक) के रूप में हुआ और 27 जनवरी 1950 को इसका नाम राष्ट्रपति का अंगरक्षक रखा गया। भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 14 मई 1957 को PBG को अपनी रजत तुरही और तुरही ध्वज भेंट किया था। सेवानिवृत्त कमांडेंट का घोड़ा 'विराट' भी समारोह में मौजूद था।
मुख्य तथ्य
- कार्यक्रम
- हीरक जयंती रजत तुरही व तुरही ध्वज – 30 सितंबर 2025
- अवसर
- राष्ट्रपति के अंगरक्षक के रूप में 75 वर्ष (1950 से)
- गठन
- 1773 – गवर्नर-जनरल का अंगरक्षक; सेना की सबसे पुरानी रेजिमेंट
- PBG नाम
- 27 जनवरी 1950
- पहली तुरही
- डॉ. राजेंद्र प्रसाद – 14 मई 1957
- उपस्थित
- 'विराट', सेवानिवृत्त कमांडेंट का घोड़ा
अभ्यास MCQ 3 प्रश्न
भारतीय सेना की सबसे पुरानी रेजिमेंट, राष्ट्रपति का अंगरक्षक, मूल रूप से किस वर्ष गठित हुई थी?
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सही उत्तर: A — 1773
रेजिमेंट का गठन 1773 में गवर्नर-जनरल के अंगरक्षक के रूप में हुआ और 27 जनवरी 1950 को इसका नाम राष्ट्रपति का अंगरक्षक रखा गया।
30 सितंबर 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रपति के अंगरक्षक को क्या भेंट किया?
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सही उत्तर: B — हीरक जयंती रजत तुरही और तुरही ध्वज
राष्ट्रपति ने PBG के रूप में 75 वर्ष पूरे होने पर हीरक जयंती रजत तुरही और तुरही ध्वज भेंट किया।
राष्ट्रपति के अंगरक्षक के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. रेजिमेंट का नाम 15 अगस्त 1947 को राष्ट्रपति का अंगरक्षक रखा गया। 2. पहली रजत तुरही और तुरही ध्वज प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने भेंट किए थे। उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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सही उत्तर: D — न 1 न 2
दोनों ग़लत हैं: नाम 27 जनवरी 1950 को बदला गया, और पहली रजत तुरही व ध्वज राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 14 मई 1957 को भेंट किए।