राष्ट्रपति मुर्मु ने नई दिल्ली में NGT के राष्ट्रीय पर्यावरण सम्मेलन 2025 का उद्घाटन किया
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 29 मार्च 2025 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में राष्ट्रीय हरित अधिकरण के दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन 'पर्यावरण – 2025' का उद्घाटन किया।
सारांश
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 29 मार्च 2025 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन 'पर्यावरण – 2025' का उद्घाटन किया। पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और महान्यायवादी आर. वेंकटरमणी शामिल हुए, तथा NGT अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव उपस्थित थे। राष्ट्रपति ने विकास और पर्यावरण संरक्षण में संतुलन पर ज़ोर दिया और कहा कि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ पर्यावरण देना नैतिक ज़िम्मेदारी है। NGT की स्थापना 18 अक्टूबर 2010 को राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के तहत पर्यावरण संरक्षण और वनों व अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से जुड़े मामलों के प्रभावी और शीघ्र निपटारे के लिए हुई थी।
मुख्य तथ्य
- तारीख
- 29 मार्च 2025, विज्ञान भवन, नई दिल्ली
- उद्घाटन
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु
- आयोजक
- राष्ट्रीय हरित अधिकरण; दो दिवसीय सम्मेलन
- NGT अध्यक्ष
- न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव
- NGT स्थापना
- 18 अक्टूबर 2010, NGT अधिनियम, 2010 के तहत
अभ्यास MCQ 3 प्रश्न
29 मार्च 2025 को नई दिल्ली में राष्ट्रीय हरित अधिकरण के राष्ट्रीय सम्मेलन 'पर्यावरण – 2025' का उद्घाटन किसने किया?
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सही उत्तर: C — राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने विज्ञान भवन में दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन किया।
मार्च 2025 में राष्ट्रीय पर्यावरण सम्मेलन के समय राष्ट्रीय हरित अधिकरण के अध्यक्ष कौन थे?
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सही उत्तर: D — न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव
न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव NGT अध्यक्ष थे; न्यायमूर्ति विक्रम नाथ सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश के रूप में शामिल हुए।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इसकी स्थापना 18 अक्टूबर 2010 को राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के तहत हुई। 2. यह सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 में निर्धारित प्रक्रिया से बंधा है। उपरोक्त में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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सही उत्तर: A — केवल 1
NGT की स्थापना 18 अक्टूबर 2010 को NGT अधिनियम, 2010 के तहत हुई। यह CPC की प्रक्रिया से बंधा नहीं है और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों से निर्देशित होता है।