संसदीय राजभाषा समिति ने राष्ट्रपति मुर्मू को अपना 13वाँ प्रतिवेदन सौंपा
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसदीय राजभाषा समिति के सदस्यों के साथ 16 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भेंट की और समिति का 13वाँ प्रतिवेदन सौंपा।
सारांश
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसदीय राजभाषा समिति के सदस्यों के साथ 16 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भेंट की और समिति का 13वाँ प्रतिवेदन सौंपा। शाह ने कहा कि समिति ने पिछले छह वर्षों में राष्ट्रपति को चार प्रतिवेदन सौंपे हैं। स्थैतिक संदर्भ: समिति का गठन राजभाषा अधिनियम, 1963 की धारा 4 के तहत होता है। इसमें 30 सदस्य होते हैं — 20 लोकसभा से और 10 राज्यसभा से — जो एकल संक्रमणीय मत द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व से चुने जाते हैं। इसका कर्तव्य संघ के राजकीय प्रयोजनों के लिए हिंदी के प्रयोग में प्रगति की समीक्षा कर राष्ट्रपति को प्रतिवेदन देना है, जिसे राष्ट्रपति संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाते हैं और सभी राज्य सरकारों को भेजते हैं।
मुख्य तथ्य
- तिथि और स्थान
- 16 फरवरी 2026, नई दिल्ली
- प्रतिवेदन
- समिति का 13वाँ प्रतिवेदन
- प्रस्तुतकर्ता
- अमित शाह और समिति सदस्य
- हालिया कार्य
- पिछले छह वर्षों में चार प्रतिवेदन
- विधिक आधार
- धारा 4, राजभाषा अधिनियम, 1963
- संरचना
- 30 सदस्य: 20 लोकसभा, 10 राज्यसभा
- कर्तव्य
- संघ के राजकीय प्रयोजनों में हिंदी प्रयोग की समीक्षा; राष्ट्रपति को प्रतिवेदन
अभ्यास MCQ 3 प्रश्न
16 फरवरी 2026 को राष्ट्रपति को संसदीय राजभाषा समिति का कौन-सा प्रतिवेदन सौंपा गया?
उत्तर देखें
सही उत्तर: D — 13वाँ
अमित शाह और समिति सदस्यों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को समिति का 13वाँ प्रतिवेदन सौंपा।
संसदीय राजभाषा समिति का गठन किस कानून के तहत होता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: C — राजभाषा अधिनियम, 1963 की धारा 4
समिति का गठन राजभाषा अधिनियम, 1963 की धारा 4 के तहत होता है। धारा 3 अंग्रेज़ी के निरंतर प्रयोग से संबंधित है।
संसदीय राजभाषा समिति के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इसमें 30 सदस्य होते हैं — 20 लोकसभा से और 10 राज्यसभा से। 2. इसके सदस्य राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत होते हैं। उपरोक्त में से कौन-सा/से सही है/हैं?
उत्तर देखें
सही उत्तर: A — केवल 1
केवल 1 सही है। राजभाषा अधिनियम, 1963 की धारा 4(2) के तहत सदस्य प्रत्येक सदन के सदस्यों द्वारा एकल संक्रमणीय मत से आनुपातिक प्रतिनिधित्व द्वारा चुने जाते हैं।