पारादीप बंदरगाह पर ₹797 करोड़ की हरित हाइड्रोजन जेटी को मंज़ूरी
बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने 25 फरवरी 2026 को ओडिशा के पारादीप बंदरगाह पर हरित हाइड्रोजन, अमोनिया और अन्य तरल कार्गो के लिए ₹797.17 करोड़ की समर्पित जेटी को मंज़ूरी दी।
सारांश
बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने 25 फरवरी 2026 को ओडिशा के पारादीप बंदरगाह पर हरित हाइड्रोजन, अमोनिया और अन्य तरल कार्गो के लिए ₹797.17 करोड़ की समर्पित जेटी को मंज़ूरी दी। पारादीप पोर्ट अथॉरिटी इसे 4 मिलियन टन प्रति वर्ष क्षमता के साथ निर्माण-संचालन-हस्तांतरण (BOT) आधार पर बनाएगी और निर्माण के दौरान लागत का 20% (₹159.43 करोड़) पूंजी सहायता देगी; इसके 24 महीनों में पूरा होने की उम्मीद है। केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि यह राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत ओडिशा के उभरते हरित हाइड्रोजन क्लस्टरों को वैश्विक बाज़ारों से जोड़ेगी; इस मिशन को मंत्रिमंडल ने 4 जनवरी 2023 को ₹19,744 करोड़ के परिव्यय और 2030 तक प्रति वर्ष कम से कम 5 MMT हरित हाइड्रोजन के लक्ष्य के साथ मंज़ूरी दी थी।
मुख्य तथ्य
- तिथि
- 25 फरवरी 2026
- लागत
- ₹797.17 करोड़
- क्षमता
- 4 MTPA
- मॉडल
- BOT; बंदरगाह की पूंजी सहायता 20% (₹159.43 करोड़)
- समय-सीमा
- 24 महीने
- NGHM
- 4 जनवरी 2023 को मंज़ूर; ₹19,744 करोड़; 2030 तक 5 MMT/वर्ष
अभ्यास MCQ 3 प्रश्न
फरवरी 2026 में केंद्र ने किस बंदरगाह पर ₹797 करोड़ की हरित हाइड्रोजन जेटी को मंज़ूरी दी?
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सही उत्तर: D — पारादीप
हरित हाइड्रोजन, अमोनिया और तरल कार्गो की समर्पित जेटी ओडिशा के पारादीप बंदरगाह पर है।
फरवरी 2026 में पारादीप बंदरगाह पर मंज़ूर हरित हाइड्रोजन जेटी की हैंडलिंग क्षमता कितनी है?
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सही उत्तर: C — 4 MTPA
सुविधा की हैंडलिंग क्षमता 4.0 मिलियन टन प्रति वर्ष होगी और यह BOT आधार पर बनेगी।
राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसे जनवरी 2023 में ₹19,744 करोड़ के प्रारंभिक परिव्यय के साथ मंज़ूरी दी। 2. इसका लक्ष्य 2030 तक प्रति वर्ष कम से कम 5 MMT हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता है। उपरोक्त में से कौन-सा/से सही है/हैं?
उत्तर देखें
सही उत्तर: C — 1 और 2 दोनों
दोनों सही हैं। मंत्रिमंडल ने 4 जनवरी 2023 को मिशन को मंज़ूरी दी (₹19,744 करोड़, जिसमें SIGHT कार्यक्रम के लिए ₹17,490 करोड़), लक्ष्य 2030 तक कम से कम 5 MMT प्रति वर्ष।