NHAI राष्ट्रीय राजमार्गों के रखरखाव के लिए प्रेडिक्टिव एसेट मैनेजमेंट की ओर
16 जून 2026 को NHAI ने राष्ट्रीय राजमार्गों के संचालन और रखरखाव के लिए बड़े पैमाने पर परिसंपत्ति स्थिति निगरानी पर आधारित प्रेडिक्टिव एसेट मैनेजमेंट अपनाने की घोषणा की।
सारांश
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने 16 जून 2026 को राष्ट्रीय राजमार्गों के संचालन और रखरखाव में पारंपरिक रखरखाव से प्रेडिक्टिव एसेट मैनेजमेंट की ओर बदलाव की घोषणा की, ताकि खराबी जल्दी पहचानी जा सके और समय पर हस्तक्षेप हो। यह बदलाव तीन रणनीतिक स्तंभों पर आधारित है, जिनमें पहला बड़े पैमाने पर परिसंपत्ति स्थिति निगरानी है, जिसमें सड़क सतह के आंकड़ों के लिए नेटवर्क सर्वे व्हीकल, परिसंपत्तियों की डिजिटल सूची के लिए ड्रोन एनालिटिक्स मॉनिटरिंग सिस्टम और सड़क की संरचनात्मक मज़बूती के लिए फ़ॉलिंग वेट डिफ़्लेक्टोमीटर परीक्षण शामिल हैं। NHAI ने AI-आधारित डैशकैम एनालिटिक्स भी शुरू किया है।
मुख्य तथ्य
- बदलाव
- पारंपरिक से प्रेडिक्टिव रखरखाव
- ढांचा
- तीन रणनीतिक स्तंभ
- उपकरण
- नेटवर्क सर्वे व्हीकल, ड्रोन एनालिटिक्स, फ़ॉलिंग वेट डिफ़्लेक्टोमीटर
अभ्यास MCQ 1 प्रश्न
NHAI के प्रेडिक्टिव एसेट मैनेजमेंट (जून 2026) के तहत सड़क की संरचनात्मक मज़बूती आंकने और कमज़ोर हिस्सों का पता लगाने के लिए किस उपकरण का उपयोग होता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: B — फ़ॉलिंग वेट डिफ़्लेक्टोमीटर
NHAI सड़क की संरचनात्मक मज़बूती आंकने के लिए फ़ॉलिंग वेट डिफ़्लेक्टोमीटर (FWD) परीक्षण का उपयोग करता है।