नागालैंड की 3.4 करोड़ वर्ष पुरानी जीवाश्म पत्तियों ने अंटार्कटिक बर्फ़ को भारतीय मानसून से जोड़ा
DST द्वारा 9 सितंबर 2025 को जारी बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान और वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के अध्ययन ने नागालैंड की लाइसोंग संरचना की 3.4 करोड़ वर्ष पुरानी जीवाश्म पत्तियों से अंटार्कटिक बर्फ़ बनने को आरंभिक भारतीय मानसून से जोड़ा।
सारांश
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) ने 9 सितंबर 2025 को बताया कि उसके स्वायत्त संस्थानों बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान (BSIP), लखनऊ और वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान, देहरादून के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में हुए अध्ययन ने लगभग 3.4 करोड़ वर्ष पहले अंटार्कटिक हिम चादरों के बनने को भारतीय मानसून के आरंभिक विकास से जोड़ा है। नागालैंड की लाइसोंग संरचना से मिली लगभग 3.4 करोड़ वर्ष पुरानी सुसंरक्षित जीवाश्म पत्तियों से पता चला कि इस क्षेत्र में कभी बहुत अधिक वर्षा और तापमान वाली गर्म, नम जलवायु थी। 'पैलियोज्योग्राफ़ी, पैलियोक्लाइमेटोलॉजी, पैलियोइकोलॉजी' में प्रकाशित शोध में पाया गया कि अंटार्कटिक बर्फ़ की वृद्धि ने अंतर-उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र (ITCZ) को खिसकाकर वैश्विक हवा और वर्षा के पैटर्न बदले, जिससे पूर्वोत्तर भारत में तीव्र मानसूनी वर्षा हुई।
मुख्य तथ्य
- जीवाश्म स्थल
- लाइसोंग संरचना, नागालैंड
- आयु
- ~3.4 करोड़ वर्ष
- संस्थान
- BSIP लखनऊ और WIHG देहरादून (DST स्वायत्त)
- तंत्र
- अंटार्कटिक बर्फ़ की वृद्धि से ITCZ खिसका
- पत्रिका
- Palaeogeography, Palaeoclimatology, Palaeoecology
अभ्यास MCQ 2 प्रश्न
सितंबर 2025 की DST विज्ञप्ति के अनुसार नागालैंड की किस भूवैज्ञानिक संरचना की जीवाश्म पत्तियों ने अंटार्कटिक बर्फ़ बनने को आरंभिक भारतीय मानसून से जोड़ा?
उत्तर देखें
सही उत्तर: B — लाइसोंग संरचना
अध्ययन में नागालैंड की लाइसोंग संरचना की लगभग 3.4 करोड़ वर्ष पुरानी सुसंरक्षित जीवाश्म पत्तियों का उपयोग हुआ।
BSIP–WIHG अध्ययन के अनुसार लगभग 3.4 करोड़ वर्ष पहले अंटार्कटिक बर्फ़ की वृद्धि से पूर्वोत्तर भारत में तीव्र मानसूनी वर्षा कैसे हुई?
उत्तर देखें
सही उत्तर: D — अंतर-उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र (ITCZ) को खिसकाकर
शोध में पाया गया कि अंटार्कटिक बर्फ़ की वृद्धि ने प्रमुख वर्षा पट्टी अंतर-उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र (ITCZ) को खिसकाकर वैश्विक हवा और वर्षा पैटर्न बदले।