नाबार्ड के आठवें ग्रामीण आर्थिक स्थिति और भावना सर्वेक्षण में ग्रामीण उपभोग और आय में वृद्धि
11 दिसंबर 2025 को जारी नाबार्ड के ग्रामीण आर्थिक स्थिति और भावना सर्वेक्षण (RECSS) के आठवें दौर में पाया गया कि लगभग 80% ग्रामीण परिवारों ने पिछले एक वर्ष में लगातार अधिक उपभोग बताया।
सारांश
11 दिसंबर 2025 को जारी नाबार्ड के ग्रामीण आर्थिक स्थिति और भावना सर्वेक्षण (RECSS) का आठवाँ दौर ग्रामीण माँग में व्यापक सुधार दिखाता है। नाबार्ड सर्वेक्षण में लगभग 80% ग्रामीण परिवारों ने पिछले वर्ष लगातार अधिक उपभोग बताया, और मासिक आय का 67.3% उपभोग पर ख़र्च हुआ, जो सर्वेक्षण शुरू होने के बाद सबसे अधिक है। रिकॉर्ड 42.2% परिवारों ने आय वृद्धि बताई, और 75.9% को अगले वर्ष आय बढ़ने की उम्मीद है। RECSS सितंबर 2024 से हर दो महीने पर होने वाला सर्वेक्षण है।
मुख्य तथ्य
- जारी
- 11 दिसंबर 2025
- सर्वेक्षण
- RECSS, 8वाँ दौर (द्विमासिक, सितंबर 2024 से)
- अधिक उपभोग
- लगभग 80% ग्रामीण परिवार
- आय का उपभोग में हिस्सा
- 67.3%, अब तक का सर्वाधिक
- आय वृद्धि
- 42.2% परिवार
- आय बढ़ने की उम्मीद
- 75.9%
अभ्यास MCQ 2 प्रश्न
11 दिसंबर 2025 को जारी नाबार्ड के RECSS के आठवें दौर के अनुसार ग्रामीण परिवार अब अपनी मासिक आय का कितना हिस्सा उपभोग पर ख़र्च करते हैं?
उत्तर देखें
सही उत्तर: C — 67.3%
PIB 2202010: मासिक आय का 67.3% अब उपभोग पर ख़र्च होता है, जो सर्वेक्षण शुरू होने के बाद सबसे अधिक है; 42.2% ने आय वृद्धि बताई और 75.9% को आय बढ़ने की उम्मीद है।
नाबार्ड का ग्रामीण आर्थिक स्थिति और भावना सर्वेक्षण (RECSS) कितनी बार किया जाता है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: B — द्विमासिक
PIB 2202010: RECSS नाबार्ड द्वारा सितंबर 2024 से किया जाने वाला द्विमासिक आकलन है।