एन. बीरेन सिंह ने मणिपुर के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दिया
मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने 9 फ़रवरी 2025 को इंफाल के राजभवन में राज्यपाल अजय कुमार भल्ला को इस्तीफ़ा सौंपा, राज्य में जातीय हिंसा भड़कने के लगभग दो साल बाद।
सारांश
भाजपा के एन. बीरेन सिंह ने 9 फ़रवरी 2025 को इंफाल के राजभवन में राज्यपाल अजय कुमार भल्ला को पत्र सौंपकर मणिपुर के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दिया। राज्यपाल ने मंत्रिपरिषद सहित इस्तीफ़ा स्वीकार किया और उनसे वैकल्पिक व्यवस्था होने तक पद पर बने रहने को कहा। यह इस्तीफ़ा राज्य भाजपा में असंतोष के बीच और विधानसभा की बैठक से एक दिन पहले आया, जहाँ कांग्रेस अविश्वास प्रस्ताव लाने वाली थी। मणिपुर में जातीय हिंसा मई 2023 में शुरू हुई थी। अपने पत्र में सिंह ने केंद्र से सीमा पार घुसपैठ पर कार्रवाई जारी रखने का आग्रह किया।
मुख्य तथ्य
- तिथि और स्थान
- 9 फ़रवरी 2025, राजभवन, इंफाल
- राज्यपाल
- अजय कुमार भल्ला
- राज्यपाल का अनुरोध
- वैकल्पिक व्यवस्था होने तक पद पर बने रहें
- पृष्ठभूमि
- मई 2023 से जातीय हिंसा; कांग्रेस अविश्वास प्रस्ताव लाने वाली थी
अभ्यास MCQ 4 प्रश्न
एन. बीरेन सिंह ने 9 फ़रवरी 2025 को मणिपुर के मुख्यमंत्री पद से अपना इस्तीफ़ा किसे सौंपा?
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सही उत्तर: A — राज्यपाल अजय कुमार भल्ला
उन्होंने इंफाल के राजभवन में राज्यपाल अजय कुमार भल्ला को इस्तीफ़ा सौंपा।
9 फ़रवरी 2025 को एन. बीरेन सिंह का इस्तीफ़ा स्वीकार करने के बाद मणिपुर के राज्यपाल ने उनसे क्या करने को कहा?
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सही उत्तर: B — वैकल्पिक व्यवस्था होने तक पद पर बने रहें
राज्यपाल ने इस्तीफ़ा स्वीकार किया और उनसे वैकल्पिक व्यवस्था होने तक पद पर बने रहने को कहा।
9 फ़रवरी 2025 को एन. बीरेन सिंह का इस्तीफ़ा मणिपुर में जातीय हिंसा भड़कने के लगभग दो साल बाद आया। हिंसा कब भड़की थी?
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सही उत्तर: A — मई 2023
मणिपुर में जातीय हिंसा मई 2023 में भड़की थी, इस्तीफ़े से लगभग दो साल पहले।
एन. बीरेन सिंह के इस्तीफ़े (फ़रवरी 2025) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. उन्होंने इसे इंफाल के राजभवन में सौंपा। 2. राज्यपाल ने उनकी मंत्रिपरिषद का इस्तीफ़ा भी स्वीकार किया। 3. उन्होंने मणिपुर विधानसभा में शक्ति परीक्षण हारने के बाद इस्तीफ़ा दिया। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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सही उत्तर: C — केवल 1 और 2
उन्होंने इंफाल के राजभवन में इस्तीफ़ा दिया और राज्यपाल ने मंत्रिपरिषद का इस्तीफ़ा भी स्वीकार किया। कोई शक्ति परीक्षण नहीं हुआ; उन्होंने विधानसभा की बैठक से एक दिन पहले इस्तीफ़ा दिया, जहाँ कांग्रेस अविश्वास प्रस्ताव लाने वाली थी।