लोकसभा ने 1856 के औपनिवेशिक क़ानून की जगह लेने वाला बिल्स ऑफ़ लैडिंग विधेयक, 2025 पारित किया
लोकसभा ने 10 मार्च 2025 को पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल द्वारा प्रस्तुत बिल्स ऑफ़ लैडिंग विधेयक, 2025 पारित किया, जो भारतीय बिल्स ऑफ़ लैडिंग अधिनियम, 1856 की जगह लेगा।
सारांश
लोकसभा ने 10 मार्च 2025 को बिल्स ऑफ़ लैडिंग विधेयक, 2025 पारित किया। केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल द्वारा प्रस्तुत यह विधेयक 169 वर्ष पुराने भारतीय बिल्स ऑफ़ लैडिंग अधिनियम, 1856 की जगह लेता है — तीन धाराओं वाला एक संक्षिप्त क़ानून, जो मुख्य रूप से अधिकारों के हस्तांतरण और माल के जहाज़ पर लादे जाने की पुष्टि से जुड़ा है। नया क़ानून प्रावधानों का सार बदले बिना भाषा सरल करता है और प्रावधानों को पुनर्व्यवस्थित करता है, केंद्र सरकार को कार्यान्वयन के लिए निर्देश जारी करने का अधिकार देता है और मानक निरसन एवं व्यावृत्ति खंड जोड़ता है। सरकार के अनुसार इससे मुक़दमेबाज़ी घटेगी और वाहकों, शिपरों और माल के वैध धारकों को स्पष्टता मिलेगी। बिल ऑफ़ लैडिंग वाहक द्वारा जारी वह दस्तावेज़ है जो शिपमेंट के लिए माल की प्राप्ति स्वीकार करता है।
मुख्य तथ्य
- पारित
- लोकसभा, 10 मार्च 2025
- प्रस्तुतकर्ता
- सर्बानंद सोनोवाल
- किसकी जगह
- भारतीय बिल्स ऑफ़ लैडिंग अधिनियम, 1856 (तीन धाराएँ)
- मुख्य बदलाव
- सरल भाषा; केंद्र निर्देश जारी कर सकेगा; निरसन एवं व्यावृत्ति खंड
- सार
- अपरिवर्तित
अभ्यास MCQ 3 प्रश्न
10 मार्च 2025 को संसद के किस सदन ने बिल्स ऑफ़ लैडिंग विधेयक, 2025 पारित किया?
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सही उत्तर: A — लोकसभा
लोकसभा ने 10 मार्च 2025 को बिल्स ऑफ़ लैडिंग विधेयक, 2025 पारित किया; राज्यसभा ने इसे बाद में पारित किया।
2025 के विधेयक द्वारा प्रतिस्थापित भारतीय बिल्स ऑफ़ लैडिंग अधिनियम, 1856 में कितनी धाराएँ थीं?
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सही उत्तर: B — तीन
सरकार ने 1856 के अधिनियम को अधिकारों के हस्तांतरण और शिपमेंट की पुष्टि से जुड़ा तीन धाराओं वाला संक्षिप्त क़ानून बताया।
बिल्स ऑफ़ लैडिंग विधेयक, 2025 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह 1856 के अधिनियम के तहत वाहकों के अधिकारों और दायित्वों में व्यापक बदलाव करता है। 2. यह केंद्र सरकार को क़ानून लागू करने के लिए निर्देश जारी करने का अधिकार देता है। उपरोक्त में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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सही उत्तर: B — केवल 2
कथन 1 ग़लत है: विधेयक प्रावधानों का सार बदले बिना भाषा सरल करता है और उन्हें पुनर्व्यवस्थित करता है। कथन 2 सही है, साथ ही एक नया निरसन एवं व्यावृत्ति खंड भी है।