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JNCASR वैज्ञानिकों ने TlCu5Se3 में तरंग जैसा ऊष्मा परिवहन खोजा, अपशिष्ट ऊष्मा से बिजली बनाने में मदद

14 सितंबर 2026 को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने बताया कि JNCASR, बेंगलुरु के शोधकर्ताओं ने कॉपर चाल्कोजेनाइड थैलियम कॉपर सेलेनाइड (TlCu5Se3) में असामान्य तरंग जैसा ऊष्मा परिवहन पाया।

सारांश

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन स्वायत्त संस्था जवाहरलाल नेहरू उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र (JNCASR), बेंगलुरु के शोधकर्ताओं ने पाया कि थैलियम कॉपर सेलेनाइड (TlCu5Se3) में असामान्य तरंग जैसा ऊष्मा परिवहन होता है। इस पदार्थ में कॉपर आयन एक सीमित क्रिस्टलीय ढांचे के भीतर ही गति करते हैं, जिससे संरचना स्थिर रहते हुए ऊष्मा प्रवाह दबता है, जबकि पारंपरिक सुपरआयनिक पदार्थों में अत्यधिक गतिशील आयन संरचना को अस्थिर कर सकते हैं। संरचनात्मक स्थिरता के साथ कम लैटिस तापीय चालकता थर्मोइलेक्ट्रिक पदार्थों के लिए उपयोगी है, जो बिजलीघरों, सीमेंट और इस्पात संयंत्रों, वाहनों, डेटा केंद्रों और बैटरी प्रणालियों की अपशिष्ट ऊष्मा को बिजली में बदलते हैं। JNCASR की न्यू केमिस्ट्री यूनिट के प्रो. कनिष्क बिस्वास के नेतृत्व में, प्रो. उमेश वी. वाघमारे के समूह के सैद्धांतिक सहयोग से हुआ यह कार्य साइंस एडवांसेज़ में प्रकाशित हुआ।

मुख्य तथ्य

संस्थान
JNCASR, बेंगलुरु — DST के अधीन स्वायत्त संस्था
पदार्थ
थैलियम कॉपर सेलेनाइड (TlCu5Se3), एक कॉपर चाल्कोजेनाइड
खोज
सीमित कॉपर-आयन विसरण से तरंग जैसा ऊष्मा परिवहन
उपयोग
अपशिष्ट ऊष्मा का थर्मोइलेक्ट्रिक रूपांतरण
प्रमुख
प्रो. कनिष्क बिस्वास, न्यू केमिस्ट्री यूनिट
जर्नल
साइंस एडवांसेज़

अभ्यास MCQ 2 प्रश्न

Q1 उन्नत

JNCASR के शोधकर्ताओं ने थर्मोइलेक्ट्रिक रूपांतरण के लिए उपयोगी असामान्य तरंग जैसा ऊष्मा परिवहन किस पदार्थ में पाया (सितंबर 2026)?

उत्तर देखें

सही उत्तर: B — थैलियम कॉपर सेलेनाइड (TlCu5Se3)

JNCASR टीम ने कॉपर चाल्कोजेनाइड TlCu5Se3 में तरंग जैसा ऊष्मा परिवहन पाया।

Q2 उन्नत

TlCu5Se3 पर JNCASR के अध्ययन के बारे में निम्नलिखित पर विचार करें: 1. थर्मोइलेक्ट्रिक पदार्थ अपशिष्ट ऊष्मा को सीधे बिजली में बदलते हैं। 2. JNCASR जैव प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन एक स्वायत्त संस्था है। उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

उत्तर देखें

सही उत्तर: A — केवल 1

केवल कथन 1 सही है। थर्मोइलेक्ट्रिक पदार्थ अपशिष्ट ऊष्मा को बिजली में बदलते हैं; JNCASR, बेंगलुरु, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन स्वायत्त संस्था है, जैव प्रौद्योगिकी विभाग के नहीं।

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