भारत ने CSIR-NIO गोवा में अंतर्राष्ट्रीय समुद्र तल प्राधिकरण की 8वीं वार्षिक ठेकेदार बैठक की मेजबानी की
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने 18 से 20 सितंबर 2025 तक CSIR-राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान, गोवा में अंतर्राष्ट्रीय समुद्र तल प्राधिकरण की 8वीं वार्षिक ठेकेदार बैठक की मेजबानी की।
सारांश
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) ने 18 से 20 सितंबर 2025 तक अंतर्राष्ट्रीय समुद्र तल प्राधिकरण (ISA) की 8वीं वार्षिक ठेकेदार बैठक की मेजबानी की। बैठक का स्थानीय आयोजन CSIR-राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान (NIO), गोवा ने किया और इसकी शुरुआत 18 सितंबर को हुई। रूस, जापान, चीन, कोरिया गणराज्य, जर्मनी और फ्रांस सहित देशों के 14 ISA अन्वेषण ठेकेदारों के प्रतिनिधि शामिल हुए, और ISA की महासचिव लेटिसिया कार्वाल्हो ने इसका उद्घाटन किया। यह बैठक 15 सितंबर को दिल्ली में ISA के साथ भारत के दूसरे पॉलीमेटैलिक सल्फाइड (PMS) अन्वेषण अनुबंध पर हस्ताक्षर के बाद हुई, जिससे भारत दो PMS अन्वेषण अनुबंध रखने वाला एकमात्र देश बन गया। ISA की स्थापना संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS) के तहत अंतर्राष्ट्रीय समुद्र तल क्षेत्र में खनिज गतिविधियों के नियमन के लिए हुई थी।
मुख्य तथ्य
- आयोजन
- ISA की 8वीं वार्षिक ठेकेदार बैठक
- तिथि / स्थान
- 18–20 सितंबर 2025, CSIR-NIO गोवा
- प्रतिभागी
- 14 ISA अन्वेषण ठेकेदारों के प्रतिनिधि
- ISA महासचिव
- लेटिसिया कार्वाल्हो
- भारत की विशेषता
- दो PMS अन्वेषण अनुबंध वाला एकमात्र देश (दूसरा 15 सितंबर 2025 को)
- ISA का आधार
- UNCLOS के तहत स्थापित
अभ्यास MCQ 2 प्रश्न
सितंबर 2025 में भारत में हुई अंतर्राष्ट्रीय समुद्र तल प्राधिकरण की 8वीं वार्षिक ठेकेदार बैठक का स्थानीय आयोजन किस संस्थान ने किया?
उत्तर देखें
सही उत्तर: B — CSIR-NIO गोवा
MoES द्वारा आयोजित इस बैठक का स्थानीय आयोजन 18 से 20 सितंबर 2025 तक CSIR-राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान (NIO), गोवा ने किया।
निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. अंतर्राष्ट्रीय समुद्र तल प्राधिकरण की स्थापना संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS) के तहत हुई। 2. भारत ISA के साथ दो पॉलीमेटैलिक सल्फाइड (PMS) अन्वेषण अनुबंध रखने वाला एकमात्र देश है। उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
उत्तर देखें
सही उत्तर: C — 1 और 2 दोनों
दोनों सही हैं। ISA की स्थापना UNCLOS के तहत हुई, और 15 सितंबर 2025 को दूसरे PMS अनुबंध के साथ भारत दो PMS अन्वेषण अनुबंध वाला एकमात्र देश बन गया।