INST मोहाली की नैनो-गोल्ड युक्त PVDF अति-पतली फिल्म ने स्व-चालित सेंसरों के लिए पायरोइलेक्ट्रिसिटी बढ़ाई
नैनो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, मोहाली के वैज्ञानिकों ने 18 मई 2026 को बताया कि अति-पतली PVDF फिल्मों में थोड़ा नैनो-गोल्ड मिलाने से छोटे तापमान बदलावों को बिजली में बदलने की उनकी क्षमता काफी बढ़ जाती है।
सारांश
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के स्वायत्त संस्थान, नैनो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (INST), मोहाली के वैज्ञानिकों ने दिखाया है कि फेरोइलेक्ट्रिक पॉलीमर पॉलीविनाइलिडीन फ्लोराइड (PVDF) में बहुत थोड़ा नैनो-गोल्ड मिलाने से उसका पायरोइलेक्ट्रिक प्रदर्शन, यानी तापमान बदलाव से बिजली बनाने की क्षमता, काफी बढ़ जाती है। प्रो. दीपांकर मंडल के नेतृत्व में सुदीप नस्कर सहित टीम ने 100 नैनोमीटर से पतली फिल्मों में षट्कोणीय नैनो-गोल्ड कण जोड़े और अत्यधिक व्यवस्थित द्विध्रुवों वाला लगभग शुद्ध ध्रुवीय PVDF चरण प्राप्त किया। फिल्मों ने 294–301 K की छोटी तापमान सीमा में कुशल पायरोइलेक्ट्रिक रूपांतरण दिखाया, जो पहनने योग्य ऊर्जा संग्रहण और परिवेश तापीय संवेदन के लिए उपयुक्त है। यह शोध एडवांस्ड फंक्शनल मैटेरियल्स में प्रकाशित हुआ।
मुख्य तथ्य
- संस्थान
- INST मोहाली (DST स्वायत्त संस्थान)
- टीम प्रमुख
- प्रो. दीपांकर मंडल (सुदीप नस्कर के साथ)
- पदार्थ
- षट्कोणीय नैनो-गोल्ड युक्त PVDF अति-पतली फिल्म (<100 nm)
- प्रभाव
- बढ़ी पायरोइलेक्ट्रिसिटी; व्यवस्थित द्विध्रुवों वाला लगभग शुद्ध ध्रुवीय चरण
- तापमान सीमा
- 294–301 K
- जर्नल
- एडवांस्ड फंक्शनल मैटेरियल्स
- उपयोग
- स्व-चालित सेंसर, फोटोडिटेक्टर, पहनने योग्य इलेक्ट्रॉनिक्स, निम्न-श्रेणी ऊष्मा संग्रहण
अभ्यास MCQ 2 प्रश्न
मई 2026 के INST मोहाली अध्ययन में पायरोइलेक्ट्रिक प्रदर्शन बढ़ाने के लिए नैनो-गोल्ड किस पॉलीमर में मिलाया गया?
उत्तर देखें
सही उत्तर: B — पॉलीविनाइलिडीन फ्लोराइड (PVDF)
टीम ने षट्कोणीय नैनो-गोल्ड के साथ फेरोइलेक्ट्रिक पॉलीमर पॉलीविनाइलिडीन फ्लोराइड (PVDF) की अति-पतली फिल्में बनाईं।
INST मोहाली की नैनो-गोल्ड फिल्मों में बढ़ाई गई 'पायरोइलेक्ट्रिसिटी' किसी पदार्थ की किस क्षमता को कहते हैं?
उत्तर देखें
सही उत्तर: A — तापमान में बदलाव से बिजली बनाना
PIB के अनुसार पायरोइलेक्ट्रिक प्रदर्शन तापमान में बदलाव से बिजली उत्पन्न करने की क्षमता है।