INST मोहाली ने निकोटीन और कोटिनिन पहचानने वाला चमकने वाला आयरन-MOF नैनोस्फीयर सेंसर विकसित किया
DST ने 15 अप्रैल 2026 को बताया कि नैनो विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान, मोहाली के वैज्ञानिकों ने आयरन मेटल-ऑर्गेनिक फ़्रेमवर्क नैनोस्फीयर से बना फ़्लोरोसेंट 'टर्न-ऑन' सेंसर विकसित किया है, जो पानी और जीवित कोशिकाओं में निकोटीन और उसके मेटाबोलाइट कोटिनिन की पहचान करता है।
सारांश
DST ने 15 अप्रैल 2026 को बताया कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के स्वायत्त संस्थान, नैनो विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान (INST), मोहाली के वैज्ञानिकों ने निकोटीन और उसके प्रमुख मेटाबोलाइट कोटिनिन के लिए फ़्लोरोसेंट 'टर्न-ऑन' सेंसर विकसित किया है। सेंसर में सॉल्वोथर्मल प्रक्रिया से बने आयरन (Fe-III) मेटल-ऑर्गेनिक फ़्रेमवर्क (MOF) नैनोस्फीयर हैं; इनके छिद्रों में निकोटीन या कोटिनिन फँसने पर नैनोस्फीयर नीले रंग की ओर झुकाव के साथ अधिक चमकते हैं। यह जलीय माध्यम और जीवित कोशिकाओं में काम करता है, चयनात्मक और पुनः उपयोग योग्य है, और यह कार्य 'नैनोस्केल' पत्रिका में प्रकाशित हुआ। कोटिनिन रक्त, लार और मूत्र में मिलने वाला निकोटीन संपर्क का स्थिर बायोमार्कर है, और GC-MS, HPLC तथा इम्यूनोएसे जैसी पारंपरिक विधियाँ महँगी हैं और कुशल संचालकों की ज़रूरत होती है।
मुख्य तथ्य
- संस्थान
- INST मोहाली (DST का स्वायत्त संस्थान)
- पदार्थ
- आयरन (Fe-III) मेटल-ऑर्गेनिक फ़्रेमवर्क नैनोस्फीयर, सॉल्वोथर्मल संश्लेषण
- पहचान
- निकोटीन और उसका मेटाबोलाइट कोटिनिन
- संकेत
- 'टर्न-ऑन' फ़्लोरोसेंस – अधिक चमक, नीले रंग की ओर
- पत्रिका
- नैनोस्केल
अभ्यास MCQ 2 प्रश्न
INST मोहाली में विकसित निकोटीन सेंसर किस पदार्थ पर आधारित है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: D — आयरन मेटल-ऑर्गेनिक फ़्रेमवर्क नैनोस्फीयर
DST के अनुसार सेंसर में आयरन (Fe-III) मेटल-ऑर्गेनिक फ़्रेमवर्क नैनोस्फीयर का उपयोग हुआ है।
INST मोहाली के निकोटीन सेंसर के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. सेंसर जिस कोटिनिन की भी पहचान करता है, वह रक्त, लार और मूत्र में मौजूद निकोटीन का स्थिर बायोमार्कर है। 2. यह 'टर्न-ऑफ़' प्रकार का सेंसर है, जिसकी फ़्लोरोसेंस निकोटीन जुड़ने पर कमज़ोर होती है। उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
उत्तर देखें
सही उत्तर: A — केवल 1
कथन 1 सही है। कथन 2 गलत है: यह 'टर्न-ऑन' सेंसर है; निकोटीन या कोटिनिन छिद्रों में आने पर नैनोस्फीयर अधिक चमकते हैं।