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INST मोहाली ने पार्किंसंस रोग की शीघ्र पहचान के लिए गोल्ड नैनोक्लस्टर सेंसर विकसित किया

DST ने 26 अगस्त 2025 को बताया कि नैनो विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान, मोहाली के वैज्ञानिकों ने गोल्ड नैनोक्लस्टर आधारित बायोसेंसर विकसित किया है, जो पार्किंसंस से जुड़े प्रोटीन α-सिन्यूक्लिन के सामान्य और विषाक्त रूपों में अंतर करता है।

सारांश

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग ने 26 अगस्त 2025 को बताया कि उसके स्वायत्त संस्थान, नैनो विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान (INST), मोहाली के वैज्ञानिकों ने पार्किंसंस रोग की शीघ्र पहचान के लिए गोल्ड नैनोक्लस्टर आधारित बायोसेंसर विकसित किया है। यह सेंसर पार्किंसंस से जुड़े प्रोटीन α-सिन्यूक्लिन के हानिरहित और विषाक्त एकत्रित रूपों में उनके सतही आवेश को पहचानकर अंतर करता है। प्रोलाइन-लेपित गोल्ड नैनोक्लस्टर सामान्य प्रोटीन से जुड़ते हैं, जबकि हिस्टिडीन-लेपित क्लस्टर विषाक्त समूहों से चिपकते हैं।

मुख्य तथ्य

घोषणा
26 अगस्त 2025, DST
संस्थान
नैनो विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान (INST), मोहाली
रोग
पार्किंसंस रोग – शीघ्र पहचान
लक्ष्य प्रोटीन
α-सिन्यूक्लिन
उपकरण
अमीनो एसिड-लेपित गोल्ड नैनोक्लस्टर (AuNCs)
कार्यप्रणाली
प्रोलाइन-लेपित → सामान्य रूप; हिस्टिडीन-लेपित → विषाक्त समूह

अभ्यास MCQ 1 प्रश्न

Q1 उन्नत

अगस्त 2025 में DST द्वारा घोषित पार्किंसंस रोग की शीघ्र पहचान वाला गोल्ड नैनोक्लस्टर बायोसेंसर किस प्रोटीन के सामान्य और विषाक्त रूपों में अंतर करता है?

उत्तर देखें

सही उत्तर: C — α-सिन्यूक्लिन

INST मोहाली का सेंसर पार्किंसंस से जुड़े प्रोटीन α-सिन्यूक्लिन के हानिरहित और विषाक्त एकत्रित रूपों में अंतर करता है।

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