रेलवे पुलों के पहुँच मार्गों और पॉइंट्स व क्रॉसिंग पर कंपोज़िट स्लीपर लगाएगा
रेल मंत्रालय ने 9 अप्रैल 2026 को पुलों के पहुँच मार्गों और पॉइंट्स व क्रॉसिंग पर कंपोज़िट स्लीपर, ट्रैक जाँच के लिए AI-सक्षम ग्राउंड पेनिट्रेशन रडार और वेल्ड के लिए मैग्नेटिक पार्टिकल टेस्टिंग अपनाने का निर्णय लिया।
सारांश
रेल मंत्रालय ने 9 अप्रैल 2026 को रेल भवन में रेल मंत्री की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में निर्णय लिया कि पुलों के पहुँच मार्गों और पॉइंट्स व क्रॉसिंग पर अब कंपोज़िट स्लीपर लगेंगे। मंत्रालय के अनुसार मिश्रित सामग्री से बने ये स्लीपर लोहे और कंक्रीट के स्लीपरों से हल्के हैं, 700 किलोग्राम प्रति वर्ग सेंटीमीटर तक भार सह सकते हैं, अधिक टिकाऊ हैं, बेहतर कुशनिंग देते हैं और बिछाने व मरम्मत में आसान हैं। ट्रैक की निगरानी के लिए निरीक्षण वाहनों में AI-सक्षम ग्राउंड पेनिट्रेशन रडार लगाया जाएगा, जो ट्रैक की नींव की स्थिति आँकेगा, और वेल्डेड जोड़ों के सूक्ष्म दोष पहचानने के लिए मैग्नेटिक पार्टिकल टेस्टिंग का उपयोग होगा।
मुख्य तथ्य
- निर्णय
- 9 अप्रैल 2026, रेल भवन समीक्षा बैठक
- कंपोज़िट स्लीपर
- पुलों के पहुँच मार्ग; पॉइंट्स व क्रॉसिंग
- भार क्षमता
- 700 किग्रा प्रति वर्ग सेमी तक
- ट्रैक निगरानी
- निरीक्षण वाहनों में AI-सक्षम ग्राउंड पेनिट्रेशन रडार
- वेल्ड
- मैग्नेटिक पार्टिकल टेस्टिंग
अभ्यास MCQ 2 प्रश्न
9 अप्रैल 2026 के निर्णय के अनुसार भारतीय रेलवे अब कंपोज़िट स्लीपर कहाँ उपयोग करेगा?
उत्तर देखें
सही उत्तर: A — पुलों के पहुँच मार्ग और पॉइंट्स व क्रॉसिंग
रेलवे के अनुसार पुलों के पहुँच मार्गों और पॉइंट्स व क्रॉसिंग पर अब कंपोज़िट स्लीपर लगेंगे।
रेलवे ने पटरियों के वेल्डेड जोड़ों में सूक्ष्म दोष पहचानने के लिए कौन-सी नई तकनीक अपनाने का निर्णय लिया?
उत्तर देखें
सही उत्तर: C — मैग्नेटिक पार्टिकल टेस्टिंग
रेलवे ने वेल्ड के लिए मैग्नेटिक पार्टिकल टेस्टिंग चुनी; ग्राउंड पेनिट्रेशन रडार ट्रैक की नींव आँकने के लिए है।