भारत और फ़्रांस ने 1992 के दोहरा कराधान परिहार अभिसमय में संशोधन प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए
भारत और फ़्रांस ने 29 सितंबर 1992 के अपने दोहरा कराधान परिहार अभिसमय में संशोधन प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए, वित्त मंत्रालय ने 23 फरवरी 2026 को बताया; इससे शेयरों की बिक्री पर पूंजीगत लाभ कर का पूरा अधिकार कंपनी के निवास वाले देश को मिलेगा और MFN खंड हटा दिया गया है।
सारांश
भारत और फ़्रांस ने 29 सितंबर 1992 के अपने दोहरा कराधान परिहार अभिसमय में संशोधन प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए, वित्त मंत्रालय ने 23 फरवरी 2026 को बताया; फ़्रांसीसी राष्ट्रपति की हालिया यात्रा के दौरान CBDT अध्यक्ष रवि अग्रवाल और फ़्रांस के राजदूत थिएरी माथू ने इस पर हस्ताक्षर किए। प्रोटोकॉल शेयरों की बिक्री से पूंजीगत लाभ पर पूरा कराधान अधिकार उस देश को देता है जहां कंपनी निवासी है, सर्वाधिक-अनुग्रह-प्राप्त राष्ट्र (MFN) खंड हटाता है, और लाभांश पर 10% की एकल दर की जगह कम से कम 10% पूंजी धारकों के लिए 5% और अन्य के लिए 15% दर लाता है। यह 'तकनीकी सेवा शुल्क' की परिभाषा भारत–अमेरिका संधि के अनुरूप करता है, सेवा स्थायी प्रतिष्ठान जोड़ता है, करों की वसूली में सहायता पर नया अनुच्छेद लाता है और BEPS बहुपक्षीय उपकरण के लागू प्रावधान शामिल करता है।
मुख्य तथ्य
- घोषणा
- 23 फरवरी 2026 (वित्त मंत्रालय)
- मूल संधि
- भारत–फ़्रांस DTAC, 29 सितंबर 1992
- हस्ताक्षरकर्ता
- रवि अग्रवाल (CBDT अध्यक्ष) और थिएरी माथू (फ़्रांस के राजदूत)
- पूंजीगत लाभ
- कंपनी के निवास वाले देश को पूरा कराधान अधिकार
- लाभांश
- 5% (≥10% हिस्सेदारी) और 15% (अन्य), 10% की जगह
- अन्य
- MFN खंड हटा; सेवा PE जोड़ा; करों की वसूली में सहायता; BEPS MLI प्रावधान
अभ्यास MCQ 3 प्रश्न
फरवरी 2026 के भारत–फ़्रांस संशोधन प्रोटोकॉल के तहत लाभांश पर 10% की एकल दर की जगह क्या लाया गया?
उत्तर देखें
सही उत्तर: A — कम से कम 10% पूंजी धारकों के लिए 5% और अन्य के लिए 15%
प्रोटोकॉल 10% की एकल दर की जगह कम से कम 10% पूंजी धारकों के लिए 5% और अन्य सभी मामलों में 15% दर लाता है।
मूल भारत–फ़्रांस दोहरा कराधान परिहार अभिसमय किस वर्ष हस्ताक्षरित हुआ था?
उत्तर देखें
सही उत्तर: B — 1992
भारत–फ़्रांस DTAC पर 29 सितंबर 1992 को हस्ताक्षर हुए थे।
फरवरी 2026 में घोषित भारत–फ़्रांस संशोधन प्रोटोकॉल के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह DTAC के प्रोटोकॉल से सर्वाधिक-अनुग्रह-प्राप्त राष्ट्र (MFN) खंड हटाता है। 2. यह शेयरों की बिक्री से पूंजीगत लाभ पर कराधान अधिकार उस देश को देता है जहां शेयरधारक निवासी है। उपरोक्त में से कौन-सा/से सही है/हैं?
उत्तर देखें
सही उत्तर: A — केवल 1
केवल 1 सही है। प्रोटोकॉल MFN खंड हटाता है और पूंजीगत लाभ पर पूरा कराधान अधिकार उस देश को देता है जहां कंपनी (शेयरधारक नहीं) निवासी है।