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UNCCD COP17 में भारत ने सूखा प्रतिक्रिया के बजाय सूखा लचीलेपन पर ज़ोर दिया

पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने 25 अगस्त 2026 को उलानबटार में UNCCD COP17 के मंत्रिस्तरीय संवाद में कहा कि सूखे को एक पूर्वानुमेय और रोके जा सकने वाले जोखिम की तरह संभालना चाहिए।

सारांश

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने 25 अगस्त 2026 को मंगोलिया के उलानबटार में संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम कन्वेंशन (UNCCD) के 17वें पक्षकार सम्मेलन (COP17) में 'सूखा लचीलापन तेज़ करना' विषय पर मंत्रिस्तरीय संवाद को संबोधित किया। यादव ने कहा कि सूखे को बार-बार आने वाली आपदा नहीं, बल्कि पूर्वानुमेय और रोके जा सकने वाले जोखिम के रूप में देखना चाहिए, और प्रतिक्रियात्मक राहत से तकनीक-आधारित लचीलेपन की ओर बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने भारत की पूर्व चेतावनी, उपग्रह-आधारित सूखा आकलन, रिज-टू-वैली वाटरशेड कार्यक्रमों और फसल बीमा का उल्लेख किया और भारत के दृष्टिकोण को 'पहले जंगल बहाल करो, फिर प्रवाह' के रूप में बताया।

मुख्य तथ्य

तारीख़ / स्थान
25 अगस्त 2026, UNCCD COP17, उलानबटार
सत्र
'सूखा लचीलापन तेज़ करना' पर मंत्रिस्तरीय संवाद
वक्ता
भूपेंद्र यादव
संदेश
सूखा पूर्वानुमेय और रोके जा सकने वाला जोखिम है
नारा
'पहले जंगल बहाल करो, फिर प्रवाह'

अभ्यास MCQ 1 प्रश्न

Q1 उन्नत

25 अगस्त 2026 को UNCCD COP17 में भारत के पर्यावरण मंत्री ने किस विषय पर मंत्रिस्तरीय संवाद को संबोधित किया?

उत्तर देखें

सही उत्तर: A — सूखा लचीलापन तेज़ करना

भूपेंद्र यादव ने उलानबटार में 'सूखा लचीलापन तेज़ करना' विषय पर मंत्रिस्तरीय संवाद को संबोधित किया और सूखे को पूर्वानुमेय, रोके जा सकने वाला जोखिम बताया।

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