IIA के खगोलविदों ने कोरोनल मास इजेक्शन का रेडियल आकार आँकने की विधि खोजी
DST ने 30 जनवरी 2025 को बताया कि भारतीय तारा भौतिकी संस्थान के खगोलविदों ने एक-बिंदु अंतरिक्ष यान मापन से कोरोनल मास इजेक्शन की तात्कालिक विस्तार गति और रेडियल आकार आँकने की विधि खोजी है।
सारांश
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के स्वायत्त संस्थान भारतीय तारा भौतिकी संस्थान (IIA) के खगोलविदों ने एक-बिंदु इन-सीटू अंतरिक्ष यान मापन से कोरोनल मास इजेक्शन (CME) की तात्कालिक विस्तार गति और रेडियल आकार आँकने की नई विधि खोजी है, DST ने 30 जनवरी 2025 को बताया। IIA की यह विधि इसलिए अहम है क्योंकि CME का रेडियल आकार तय करता है कि वह और उससे जुड़ा भू-चुंबकीय तूफ़ान पृथ्वी को कितनी देर प्रभावित करेगा। CME सूर्य से निकलने वाले चुंबकीय प्लाज़्मा बुलबुले हैं और भू-चुंबकीय तूफ़ानों के प्रमुख कारक हैं, जो संचार, उपग्रहों और पावर ग्रिड को बाधित कर सकते हैं।
मुख्य तथ्य
- सूचना
- 30 जनवरी 2025
- संस्थान
- भारतीय तारा भौतिकी संस्थान (DST)
- विधि
- एक-बिंदु डेटा से CME की तात्कालिक विस्तार गति और रेडियल आकार
- महत्व
- रेडियल आकार भू-चुंबकीय तूफ़ान की अवधि तय करता है
अभ्यास MCQ 1 प्रश्न
जनवरी 2025 में बताई गई, एक-बिंदु मापन से कोरोनल मास इजेक्शन का रेडियल आकार आँकने की विधि किस संस्थान के खगोलविदों ने खोजी?
उत्तर देखें
सही उत्तर: A — भारतीय तारा भौतिकी संस्थान
PIB 2097599: यह विधि DST के स्वायत्त संस्थान भारतीय तारा भौतिकी संस्थान के खगोलविदों ने खोजी।