बुद्ध के प्रमुख शिष्यों के पवित्र अवशेष मंगोलिया में 10 दिवसीय प्रदर्शनी के बाद भारत लौटे
10 जून 2026 को अर्हंत सारिपुत्र और अर्हंत मौद्गल्यायन के पवित्र अवशेष उलानबटार के गंदन तेगचेनलिंग मठ में 10 दिवसीय प्रदर्शनी के बाद भारत लौटे, जहां लगभग एक लाख श्रद्धालु पहुंचे।
सारांश
भगवान बुद्ध के दो प्रमुख शिष्यों, अर्हंत सारिपुत्र और अर्हंत मौद्गल्यायन, के पवित्र अवशेष उलानबटार, मंगोलिया के गंदन तेगचेनलिंग मठ में 10 दिवसीय प्रदर्शनी के बाद 10 जून 2026 को भारत लौटे। मठ के अनुरोध पर 31 मई से 9 जून 2026 तक आयोजित प्रदर्शनी मंगोलियाई बुद्ध पूर्णिमा (31 मई) को शुरू हुई और लगभग एक लाख श्रद्धालु आए। राष्ट्रीय संग्रहालय ने मध्य प्रदेश सरकार, श्रीलंका की महाबोधि सोसाइटी और अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ (IBC) के साथ मिलकर इसका आयोजन किया, और मंगोलिया सरकार ने पूरा सहयोग दिया।
मुख्य तथ्य
- वापसी
- 10 जून 2026
- अवशेष
- अर्हंत सारिपुत्र और अर्हंत मौद्गल्यायन
- स्थान
- गंदन तेगचेनलिंग मठ, उलानबटार
- श्रद्धालु
- लगभग एक लाख
अभ्यास MCQ 2 प्रश्न
अर्हंत सारिपुत्र और अर्हंत मौद्गल्यायन के पवित्र अवशेष (मई–जून 2026) मंगोलिया के किस मठ में दर्शन के लिए रखे गए?
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सही उत्तर: A — गंदन तेगचेनलिंग मठ
10 दिवसीय प्रदर्शनी उलानबटार के गंदन तेगचेनलिंग मठ में हुई।
2026 में मंगोलिया में अवशेषों की प्रदर्शनी के आयोजन में किस राज्य सरकार ने राष्ट्रीय संग्रहालय के साथ भागीदारी की?
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सही उत्तर: B — मध्य प्रदेश
राष्ट्रीय संग्रहालय ने मध्य प्रदेश सरकार, श्रीलंका की महाबोधि सोसाइटी और IBC के साथ आयोजन किया।