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1,000 से अधिक अन्नमाचार्य रचनाओं को संगीतबद्ध करने वाले कर्नाटक गायक गरिमेल्ला बालकृष्ण प्रसाद का 76 वर्ष की आयु में निधन

तिरुमला तिरुपति देवस्थानम के पूर्व आस्थान विद्वान और 1,000 से अधिक अन्नमाचार्य संकीर्तनों को संगीतबद्ध करने के लिए प्रसिद्ध कर्नाटक गायक और संगीतकार गरिमेल्ला बालकृष्ण प्रसाद का 9 मार्च 2025 को तिरुपति स्थित उनके घर पर 76 वर्ष की आयु में निधन हो गया।

सारांश

कर्नाटक गायक और संगीतकार गरिमेल्ला बालकृष्ण प्रसाद का 9 मार्च 2025 को आंध्र प्रदेश के तिरुपति स्थित उनके घर पर दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वे 76 वर्ष के थे। उन्होंने 1978 से 2006 तक अन्नमाचार्य परियोजना के माध्यम से तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) में सेवा दी और उन्हें आस्थान विद्वान (दरबारी संगीतज्ञ) की उपाधि मिली। उन्होंने 15वीं सदी के तेलुगु संत-कवि ताल्लपाक अन्नमाचार्य के 1,000 से अधिक संकीर्तनों की धुनें बनाईं, जो केवल गीत के रूप में बचे थे, और उन्हें व्यापक श्रोताओं तक पहुँचाया। उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिला था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 मार्च को शोक व्यक्त किया, और आंध्र प्रदेश सरकार ने 11 मार्च को राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार कराया।

मुख्य तथ्य

निधन
9 मार्च 2025, तिरुपति, 76 वर्ष
प्रसिद्धि
1,000+ अन्नमाचार्य संकीर्तनों की धुनें
TTD
1978–2006 सेवा; आस्थान विद्वान
सम्मान
संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार
अंतिम संस्कार
राजकीय सम्मान, 11 मार्च 2025

अभ्यास MCQ 3 प्रश्न

Q1

9 मार्च 2025 को दिवंगत गरिमेल्ला बालकृष्ण प्रसाद किस संत-कवि की रचनाओं को संगीतबद्ध करने के लिए सबसे अधिक प्रसिद्ध थे?

उत्तर देखें

सही उत्तर: A — ताल्लपाक अन्नमाचार्य

उन्होंने 15वीं सदी के तेलुगु संत-कवि ताल्लपाक अन्नमाचार्य के 1,000 से अधिक संकीर्तनों की धुनें बनाईं।

Q2 उन्नत

गरिमेल्ला बालकृष्ण प्रसाद किस मंदिर निकाय के आस्थान विद्वान थे?

उत्तर देखें

सही उत्तर: B — श्री वेंकटेश्वर मंदिर, तिरुमला (TTD)

उन्होंने 1978 से 2006 तक तिरुमला तिरुपति देवस्थानम में सेवा दी और वे उसके आस्थान विद्वान (दरबारी संगीतज्ञ) थे।

Q3 उन्नत

ताल्लपाक अन्नमाचार्य, जिनके संकीर्तनों को गरिमेल्ला बालकृष्ण प्रसाद ने संगीतबद्ध किया, किस सदी के संत-कवि थे?

उत्तर देखें

सही उत्तर: B — 15वीं सदी

अन्नमाचार्य 15वीं सदी के तेलुगु संत-कवि थे, जिनकी कई रचनाएँ केवल गीत के रूप में बची थीं।

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