कोलंबो में सप्ताह भर की प्रदर्शनी के बाद भगवान बुद्ध के देवनीमोरी अवशेष भारत लौटे
भगवान बुद्ध के देवनीमोरी अवशेष अपनी पहली अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी के बाद 11 फरवरी 2026 को कोलंबो से भारत लौटे; प्रदर्शनी में दस लाख से अधिक श्रद्धालु पहुँचे।
सारांश
भगवान बुद्ध के पवित्र देवनीमोरी अवशेष कोलंबो, श्रीलंका के गंगारामया मंदिर में सप्ताह भर की सार्वजनिक प्रदर्शनी — उनकी पहली अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी — के बाद 11 फरवरी 2026 को भारत लौटे। संस्कृति मंत्रालय के अनुसार दस लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। प्रदर्शनी का उद्घाटन श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके ने किया; भारत की ओर से गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी उपस्थित रहे। वापसी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल और अरुणाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री चौना मीन ने किया। अवशेष महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय, वडोदरा में प्रतिष्ठापित हैं और गुजरात के अरावली ज़िले में शामलाजी के पास देवनीमोरी स्थल से मिले थे। हरे शिस्ट से बने अवशेष-पात्र पर ब्राह्मी लिपि में संस्कृत अभिलेख है — 'दशबल शरीर निलय' (बुद्ध के शारीरिक अवशेष का निवास)।
मुख्य तथ्य
- वापसी तिथि
- 11 फरवरी 2026
- प्रदर्शनी स्थल
- गंगारामया मंदिर, कोलंबो
- श्रद्धालु
- दस लाख से अधिक
- उद्घाटन
- राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके
- मूल स्थल
- शामलाजी के पास देवनीमोरी, अरावली ज़िला, गुजरात; MSU बड़ौदा में संरक्षित
- पात्र
- हरा शिस्ट, ब्राह्मी लिपि, संस्कृत: 'दशबल शरीर निलय'
अभ्यास MCQ 3 प्रश्न
11 फरवरी 2026 को भारत लौटने से पहले भगवान बुद्ध के देवनीमोरी अवशेष कोलंबो के किस मंदिर में प्रदर्शित किए गए?
उत्तर देखें
सही उत्तर: B — गंगारामया मंदिर
सप्ताह भर की प्रदर्शनी कोलंबो के गंगारामया मंदिर में हुई।
बुद्ध अवशेषों का स्रोत देवनीमोरी पुरातात्विक स्थल गुजरात के किस ज़िले में शामलाजी के पास है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: D — अरावली
संस्कृति मंत्रालय के अनुसार यह स्थल गुजरात के अरावली ज़िले में शामलाजी के पास है; अवशेष MSU बड़ौदा में रखे हैं।
देवनीमोरी अवशेष-पात्र के बारे में निम्नलिखित पर विचार कीजिए: 1. यह हरे शिस्ट से बना है। 2. इसका अभिलेख खरोष्ठी लिपि और पालि भाषा में है। उपरोक्त में से कौन-सा/से सही है/हैं?
उत्तर देखें
सही उत्तर: A — केवल 1
केवल 1 सही है। हरे शिस्ट के पात्र पर ब्राह्मी लिपि और संस्कृत भाषा में 'दशबल शरीर निलय' अंकित है।