CSIR ने फसल अवशेष से सड़क बाइंडर बनाने वाली स्वदेशी बायो-बिटुमेन तकनीक हस्तांतरित की
30 मार्च 2026 को डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि CSIR-CRRI और CSIR-IIP की तकनीक से फसल अवशेष से बना बायो-बिटुमेन भारत का लगभग ₹40,000 करोड़ वार्षिक आयात बचा सकता है।
सारांश
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 30 मार्च 2026 को कहा कि फसल अवशेष से बना बायो-बिटुमेन भारत का लगभग ₹40,000 करोड़ वार्षिक आयात बचा सकता है। यह स्वदेशी तकनीक CSIR–केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (CRRI), नई दिल्ली और CSIR–भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (IIP), देहरादून ने विकसित की है। भारत में हर वर्ष लगभग 600 मिलियन टन फसल अवशेष होता है और लगभग 88 लाख टन बिटुमेन की ज़रूरत है, जिसका 50–58% आयात होता है।
मुख्य तथ्य
- तकनीक
- फसल अवशेष से बायो-बिटुमेन
- विकसित
- CSIR-CRRI (नई दिल्ली) और CSIR-IIP (देहरादून)
- संभावित बचत
- लगभग ₹40,000 करोड़ वार्षिक आयात
- फसल अवशेष
- लगभग 600 मिलियन टन प्रति वर्ष
- बिटुमेन ज़रूरत
- लगभग 88 लाख टन प्रति वर्ष; 50–58% आयात
अभ्यास MCQ 1 प्रश्न
मार्च 2026 में चर्चित स्वदेशी बायो-बिटुमेन तकनीक CSIR–भारतीय पेट्रोलियम संस्थान, देहरादून और CSIR की किस अन्य प्रयोगशाला ने विकसित की?
उत्तर देखें
सही उत्तर: D — CSIR–केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान
यह तकनीक CSIR–केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (CRRI), नई दिल्ली और CSIR–IIP, देहरादून ने विकसित की।