कृषि और ग्रामीण श्रमिकों के लिए CPI, सितंबर 2025: AL 136.23, RL 136.42
PIB के 18 अक्टूबर 2025 के अनुसार श्रम ब्यूरो का कृषि श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (आधार 2019=100) सितंबर 2025 में 0.11 अंक घटकर 136.23 और ग्रामीण श्रमिकों का 0.18 अंक घटकर 136.42 रहा; वार्षिक मुद्रास्फीति -0.07% और 0.31% रही।
सारांश
PIB के 18 अक्टूबर 2025 के अनुसार श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के श्रम ब्यूरो ने सितंबर 2025 के लिए कृषि श्रमिकों और ग्रामीण श्रमिकों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-AL और CPI-RL, आधार 2019=100) जारी किए। ये सूचकांक 34 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 787 नमूना गांवों के आंकड़ों पर आधारित हैं। CPI-AL 0.11 अंक घटकर 136.23 और CPI-RL 0.18 अंक घटकर 136.42 पर रहा। वार्षिक मुद्रास्फीति कृषि श्रमिकों के लिए -0.07% और ग्रामीण श्रमिकों के लिए 0.31% रही, जबकि खाद्य मुद्रास्फीति -2.35% (AL) और -1.81% (RL) रही।
मुख्य तथ्य
- संकलनकर्ता
- श्रम ब्यूरो, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय
- आधार
- 2019=100
- नमूना
- 787 गांव, 34 राज्य/केंद्र शासित प्रदेश
- CPI-AL सितंबर 2025
- 136.23 (0.11 कम)
- CPI-RL सितंबर 2025
- 136.42 (0.18 कम)
- वार्षिक मुद्रास्फीति
- AL -0.07%; RL 0.31%
- खाद्य मुद्रास्फीति
- AL -2.35%; RL -1.81%
अभ्यास MCQ 3 प्रश्न
सितंबर 2025 के लिए जारी कृषि श्रमिकों और ग्रामीण श्रमिकों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक का आधार वर्ष क्या है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: C — 2019=100
PIB: श्रम ब्यूरो CPI-AL और CPI-RL आधार वर्ष 2019=100 के साथ जारी करता है।
कृषि श्रमिकों और ग्रामीण श्रमिकों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक कौन-सी संस्था संकलित और जारी करती है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: B — श्रम ब्यूरो
PIB: श्रम एवं रोजगार मंत्रालय का श्रम ब्यूरो CPI-AL और CPI-RL जारी करता है।
सितंबर 2025 के CPI-AL और CPI-RL के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वार्षिक मुद्रास्फीति कृषि श्रमिकों के लिए -0.07% और ग्रामीण श्रमिकों के लिए 0.31% रही। 2. ये सूचकांक 34 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 787 नमूना गांवों के आंकड़ों पर आधारित हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
उत्तर देखें
सही उत्तर: C — 1 और 2 दोनों
दोनों सही हैं। PIB: सितंबर 2025 में वार्षिक मुद्रास्फीति -0.07% (AL) और 0.31% (RL) रही; सूचकांक 34 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 787 नमूना गांवों के आंकड़ों पर आधारित हैं।