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4,000 वर्ष पुरानी ढोकरा कला सहित छत्तीसगढ़ के 16 स्मृति-चिह्न 8वीं PM मेमेंटोज़ ई-नीलामी में प्रदर्शित

7 अक्टूबर 2026 को संस्कृति मंत्रालय ने 8वीं PM मेमेंटोज़ ई-नीलामी में छत्तीसगढ़ के 16 स्मृति-चिह्नों को प्रदर्शित किया, जिनके केंद्र में भारत में 4,000 वर्ष से अधिक पुरानी ढोकरा लॉस्ट-वैक्स धातु ढलाई कला है; नीलामी 31 अक्टूबर 2026 तक बढ़ाई गई है और इसकी आय नमामि गंगे परियोजना को जाएगी।

सारांश

संस्कृति मंत्रालय ने 7 अक्टूबर 2026 को PM मेमेंटोज़ ई-नीलामी के 8वें संस्करण में छत्तीसगढ़ के 16 स्मृति-चिह्नों का संग्रह प्रदर्शित किया। इस संग्रह के केंद्र में ढोकरा है, जो भारत में 4,000 वर्ष से अधिक के इतिहास वाली पारंपरिक लॉस्ट-वैक्स (मोम क्षय) धातु ढलाई कला है; इसमें एलिफेंट हेड नंदी और माड़िया-माड़िन जनजातीय युगल प्रतिमा जैसी कृतियाँ, रामनामी समाज का जप वस्त्र और महतारी वंदन योजना पर काष्ठ-उत्कीर्ण पैनल भी शामिल हैं। नीलामी 31 अक्टूबर 2026 तक बढ़ा दी गई है और इसकी आय नमामि गंगे परियोजना में लगाई जाएगी।

मुख्य तथ्य

संग्रह
छत्तीसगढ़ के 16 स्मृति-चिह्न
प्रमुख कला
ढोकरा – लॉस्ट-वैक्स धातु ढलाई, भारत में 4,000+ वर्ष पुरानी
ढोकरा कृतियाँ
एलिफेंट हेड नंदी, खड़े नंदी, माड़िया-माड़िन जनजातीय युगल प्रतिमा
अन्य वस्तुएँ
रामनामी समाज का 'राम राम' वस्त्र; महतारी वंदन योजना काष्ठ पैनल; छत्तीसगढ़ विधानसभा रजत जयंती स्मृति-चिह्न; नवा रायपुर मॉडल
नीलामी
8वीं PM मेमेंटोज़ ई-नीलामी, 31 अक्टूबर 2026 तक बढ़ाई गई
आय
नमामि गंगे परियोजना
पोर्टल
pmmementos.gov.in

अभ्यास MCQ 1 प्रश्न

Q1

8वीं PM मेमेंटोज़ ई-नीलामी (अक्टूबर 2026) में छत्तीसगढ़ के स्मृति-चिह्नों के केंद्र में रही ढोकरा कला किसका पारंपरिक रूप है?

उत्तर देखें

सही उत्तर: B — लॉस्ट-वैक्स धातु ढलाई

ढोकरा भारत में 4,000 वर्ष से अधिक पुरानी पारंपरिक लॉस्ट-वैक्स (मोम क्षय) धातु ढलाई कला है।

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