CEA ने सरफेस हाइड्रोकाइनेटिक टर्बाइन तकनीक को जल-विद्युत श्रेणी में मान्यता दी
26 नवंबर 2024 को विद्युत मंत्रालय ने बताया कि केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने स्वदेशी सरफेस हाइड्रोकाइनेटिक टर्बाइन (SHKT) तकनीक को जल-विद्युत श्रेणी में मान्यता दी है।
सारांश
26 नवंबर 2024 को विद्युत मंत्रालय ने घोषणा की कि केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) ने शुद्ध-शून्य लक्ष्यों के लिए वैकल्पिक तकनीकों को बढ़ावा देने हेतु स्वदेशी सरफेस हाइड्रोकाइनेटिक टर्बाइन (SHKT) तकनीक को जल-विद्युत श्रेणी में मान्यता दी है। बांध, वियर या बैराज के पीछे संग्रहित जल की स्थितिज ऊर्जा का उपयोग करने वाली पारंपरिक इकाइयों के विपरीत, SHKT व्यावहारिक रूप से शून्य हेड वाले बहते पानी की गतिज ऊर्जा का उपयोग करता है। CEA के अनुसार ये टर्बाइन लगाने में आसान और किफायती हैं, उत्पादन लागत ₹2-3 प्रति यूनिट है, और इन्हें नहरों तथा जल-विद्युत टेलरेस चैनलों में लगाया जा सकता है, जिसमें गीगावाट स्तर की क्षमता है।
मुख्य तथ्य
- मान्यता
- केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA)
- श्रेणी
- जल-विद्युत
- सिद्धांत
- बहते पानी की गतिज ऊर्जा; व्यावहारिक रूप से शून्य हेड
- लागत
- ₹2-3 प्रति यूनिट
- स्थल
- नहरें, टेलरेस चैनल; GW स्तर की क्षमता
अभ्यास MCQ 2 प्रश्न
नवंबर 2024 में CEA द्वारा मान्य सरफेस हाइड्रोकाइनेटिक टर्बाइन (SHKT) तकनीक मुख्यतः किसका उपयोग करके बिजली बनाती है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: C — व्यावहारिक रूप से शून्य हेड वाले बहते पानी की गतिज ऊर्जा
PIB (विद्युत): SHKT व्यावहारिक रूप से शून्य हेड वाले बहते पानी की गतिज ऊर्जा का उपयोग करता है, जबकि पारंपरिक इकाइयां बांध, वियर या बैराज पर निर्भर होती हैं।
नवंबर 2024 में तकनीक को मान्यता देते समय CEA ने सरफेस हाइड्रोकाइनेटिक टर्बाइन की प्रति यूनिट उत्पादन लागत कितनी बताई?
उत्तर देखें
सही उत्तर: D — ₹2-3 प्रति यूनिट
PIB (विद्युत): सरफेस हाइड्रोकाइनेटिक टर्बाइन लगाने में आसान और किफायती हैं, उत्पादन लागत ₹2-3 प्रति यूनिट है।