CCEA ने संशोधित शक्ति नीति को मंज़ूरी दी: बिजली संयंत्रों को दो विंडो से कोयला लिंकेज
आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 7 मई 2025 को बिजली क्षेत्र के लिए कोयला आवंटन की संशोधित शक्ति नीति को मंज़ूरी दी, जिसमें मौजूदा आठ पैरा को दो विंडो — अधिसूचित मूल्य पर कोयला और अधिसूचित मूल्य से ऊपर प्रीमियम पर कोयला — में समेटा गया।
सारांश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने 7 मई 2025 को ताप विद्युत संयंत्रों को नए कोयला लिंकेज देने के लिए संशोधित शक्ति (SHAKTI) नीति को मंज़ूरी दी। कोयला आवंटन के मौजूदा आठ पैरा को दो विंडो में समेटा गया है। विंडो-I में केंद्रीय उत्पादन कंपनियों और राज्यों को अधिसूचित मूल्य पर कोयला लिंकेज मिलेगा। विंडो-II में कोई भी घरेलू कोयला आधारित बिजली उत्पादक, और आवश्यकता होने पर आयातित कोयला आधारित संयंत्र, अधिसूचित मूल्य से ऊपर प्रीमियम देकर नीलामी के आधार पर 12 महीने तक या 12 महीने से अधिक 25 वर्ष तक कोयला प्राप्त कर सकते हैं। विंडो-II के कोयले से बनी बिजली बेचने के लिए बिजली खरीद समझौते (PPA) की आवश्यकता नहीं होगी। कोल इंडिया लिमिटेड और सिंगरेनी कोलियरीज़ कंपनी लिमिटेड निर्णय लागू करेंगी। शक्ति नीति पहली बार 2017 में आई थी।
मुख्य तथ्य
- मंज़ूरी
- 7 मई 2025, CCEA
- ढांचा
- आठ पैरा → दो विंडो
- विंडो-II
- प्रीमियम पर नीलामी; 25 वर्ष तक; PPA ज़रूरी नहीं
- मूल नीति
- 2017
अभ्यास MCQ 3 प्रश्न
7 मई 2025 को स्वीकृत संशोधित शक्ति नीति में कोयला आवंटन के मौजूदा आठ पैरा को कितनी विंडो में समेटा गया है?
उत्तर देखें
सही उत्तर: C — दो
आठ पैरा को दो विंडो में समेटा गया: विंडो-I (अधिसूचित मूल्य) और विंडो-II (अधिसूचित मूल्य से ऊपर प्रीमियम)।
संशोधित शक्ति नीति की विंडो-II के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बिजली उत्पादक अधिसूचित मूल्य से ऊपर प्रीमियम देकर 12 महीने से अधिक 25 वर्ष तक कोयला प्राप्त कर सकते हैं। 2. विंडो-II के कोयले से बनी बिजली बेचने के लिए बिजली खरीद समझौता अनिवार्य है। उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
उत्तर देखें
सही उत्तर: A — केवल 1
केवल 1 सही है। विंडो-II के कोयले से बनी बिजली के लिए PPA की आवश्यकता समाप्त कर दी गई है।
कोयला आवंटन की मूल शक्ति नीति किस वर्ष लाई गई थी?
उत्तर देखें
सही उत्तर: D — 2017
कोयला मंत्रालय के अनुसार शक्ति नीति 2017 में आई थी, जिससे आवंटन नामांकन से नीलामी/टैरिफ आधारित बोली की ओर गया।