CBDT ने आयकर अधिनियम के तहत अपराधों के शमन के लिए संशोधित दिशानिर्देश जारी किए
17 अक्टूबर 2024 को भारत में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने आयकर अधिनियम, 1961 के तहत अपराधों के शमन (compounding) के लिए संशोधित दिशानिर्देश जारी किए, जिससे प्रक्रिया सरल हुई और शमन शुल्क घटे।
सारांश
17 अक्टूबर 2024 को भारत में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने वित्त मंत्री की बजट घोषणा के अनुरूप आयकर अधिनियम, 1961 के तहत अपराधों के शमन के लिए संशोधित दिशानिर्देश जारी किए। ये दिशानिर्देश सभी पूर्ववर्ती दिशानिर्देशों का स्थान लेते हैं और लंबित व नए आवेदनों पर लागू होते हैं। इनमें अपराधों का वर्गीकरण समाप्त किया गया है, आवेदनों की संख्या की सीमा हटाई गई है और कमियां दूर करने पर नया आवेदन करने की अनुमति दी गई है। शमन शुल्क को युक्तिसंगत बनाया गया है: शमन शुल्क के विलंबित भुगतान पर ब्याज समाप्त किया गया है और TDS चूक के लिए 2%, 3% और 5% की कई दरों के स्थान पर 1.5% प्रति माह की एकल दर लागू की गई है।
मुख्य तथ्य
- जारी
- 17 अक्टूबर 2024
- द्वारा
- CBDT
- कानून
- आयकर अधिनियम, 1961
- दायरा
- सभी पूर्ववर्ती दिशानिर्देशों का स्थान; लंबित व नए आवेदन
- सरलीकरण
- अपराधों का वर्गीकरण नहीं; आवेदनों की संख्या की सीमा नहीं
- TDS चूक दर
- एकल 1.5% प्रति माह (पहले 2%, 3%, 5%)
- ब्याज
- विलंबित शमन शुल्क पर समाप्त
अभ्यास MCQ 2 प्रश्न
17 अक्टूबर 2024 के CBDT के संशोधित शमन दिशानिर्देशों के तहत TDS चूक के शमन शुल्क की कई दरों के स्थान पर कौन-सी एकल दर लागू की गई?
उत्तर देखें
सही उत्तर: D — 1.5% प्रति माह
PIB, 17 अक्टूबर 2024: TDS चूक के लिए 2%, 3% और 5% की कई दरों को घटाकर 1.5% प्रति माह की एकल दर कर दिया गया है।
17 अक्टूबर 2024 को जारी CBDT के संशोधित शमन दिशानिर्देशों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ये केवल जारी होने की तिथि के बाद दाखिल नए आवेदनों पर लागू होते हैं। 2. शमन शुल्क के विलंबित भुगतान पर लगने वाला ब्याज समाप्त कर दिया गया है। उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
उत्तर देखें
सही उत्तर: B — केवल 2
कथन 1 गलत है: PIB के अनुसार दिशानिर्देश लंबित और नए दोनों आवेदनों पर लागू होते हैं। कथन 2 सही है: शमन शुल्क के विलंबित भुगतान पर ब्याज समाप्त कर दिया गया है।