BSIP वैज्ञानिकों ने गोदावरी बेसिन में 25 करोड़ वर्ष पुरानी पर्मियन दावाग्नि के प्रमाण खोजे
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने 6 मई 2025 को बताया कि बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान, लखनऊ के वैज्ञानिकों ने गोदावरी बेसिन के शेल नमूनों से पर्मियन काल की लगभग 25 करोड़ वर्ष पुरानी दावाग्नि के प्रमाण खोजे हैं।
सारांश
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के स्वायत्त संस्थान बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान (BSIP), लखनऊ के वैज्ञानिकों ने लगभग 25 करोड़ वर्ष पहले पर्मियन काल में फैली प्राचीन दावाग्नि (पुरा-अग्नि) के चिह्न खोजे हैं; DST ने 6 मई 2025 को यह जानकारी दी। उन्होंने गोदावरी बेसिन की गहराई से लिए गए शेल नमूनों का पैलिनोफेसीज़ विश्लेषण और उन्नत रसायन विज्ञान से अध्ययन किया, ताकि उसी स्थान पर जली आग के कोयले और हवा या पानी से बहकर आए कोयले में अंतर किया जा सके। विज्ञप्ति के अनुसार रानीगंज कोयला क्षेत्र भारत में उन पहले स्थलों में था जहाँ जीवाश्म चारकोल की पहचान हुई।
मुख्य तथ्य
- घोषणा
- 6 मई 2025
- संस्थान
- BSIP, लखनऊ
- काल
- पर्मियन, लगभग 25 करोड़ वर्ष पूर्व
- नमूने
- गोदावरी बेसिन के शेल
अभ्यास MCQ 1 प्रश्न
6 मई 2025 को बताए गए पर्मियन पुरा-अग्नि अध्ययन के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह DST के स्वायत्त संस्थान बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान, लखनऊ के वैज्ञानिकों ने किया। 2. अध्ययन किए गए शेल नमूने रानीगंज कोयला क्षेत्र से लिए गए थे। उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
उत्तर देखें
सही उत्तर: A — केवल 1
केवल 1 सही है। नमूने गोदावरी बेसिन से थे; रानीगंज कोयला क्षेत्र का उल्लेख भारत में जीवाश्म चारकोल की पहचान वाले पहले स्थलों में है।