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देवरिया ताल से BSIP के पराग अध्ययन ने कमजोर मानसून को हड़प्पा सभ्यता के सिकुड़ने से जोड़ा

29 जुलाई 2026 को DST ने बताया कि गढ़वाल हिमालय की देवरिया ताल के अवसाद कोर में पराग के बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान के अध्ययन ने लगभग 5100 से 4000 वर्ष पूर्व के कमजोर भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून को हड़प्पा सभ्यता के सिकुड़ने से जोड़ा है।

सारांश

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के स्वायत्त संस्थान बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान (BSIP) के वैज्ञानिकों ने डॉ. मोहम्मद फिरोज़ क़मर के नेतृत्व में गढ़वाल हिमालय की देवरिया ताल से प्राप्त एक सटीक तिथि वाले अवसाद कोर (10 AMS रेडियोकार्बन तिथियां) का अध्ययन किया। पराग रिकॉर्ड में लगभग 4250 cal yr BP पर ओक/चीड़ अनुपात में अचानक वृद्धि दिखी, जो वैश्विक स्तर पर ज्ञात अचानक शुष्क जलवायु की '4.2 ka घटना' से मेल खाती है। अध्ययन के अनुसार लगभग 5100 से 4000 cal yr BP के बीच कमजोर भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून के कारण हड़प्पा (सिंधु घाटी) सभ्यता सिकुड़ी और सिंधु व घग्गर-हकरा नदियों के किनारे रहने वाले लोग पूर्वी गंगा मैदानों की ओर चले गए।

मुख्य तथ्य

संस्थान
बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान (BSIP), DST
स्थल
देवरिया ताल, गढ़वाल हिमालय
साक्ष्य
पराग और बीजाणु; 10 AMS रेडियोकार्बन तिथियां
मुख्य संकेत
~4250 cal yr BP पर ओक/चीड़ अनुपात में अचानक वृद्धि ('4.2 ka घटना')
निष्कर्ष
~5100–4000 cal yr BP कमजोर मानसून; हड़प्पावासी पूर्वी गंगा मैदानों की ओर गए
प्रमुख वैज्ञानिक
डॉ. मोहम्मद फिरोज़ क़मर

अभ्यास MCQ 2 प्रश्न

Q1 उन्नत

जुलाई 2026 में जारी BSIP के जिस पराग अध्ययन ने कमजोर मानसून को हड़प्पा सभ्यता के सिकुड़ने से जोड़ा, वह किस झील के अवसाद कोर पर आधारित था?

उत्तर देखें

सही उत्तर: B — देवरिया ताल

BSIP ने गढ़वाल हिमालय की देवरिया ताल से प्राप्त सटीक तिथि वाले अवसाद कोर का अध्ययन किया।

Q2 उन्नत

BSIP के देवरिया ताल अध्ययन के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इसमें लगभग 4250 cal yr BP पर ओक/चीड़ अनुपात में अचानक वृद्धि मिली, जो '4.2 ka घटना' से मेल खाती है। 2. इसके अनुसार हड़प्पावासी पश्चिम की ओर सिंधु डेल्टा की तरफ गए। 3. अतीत की वनस्पति और जलवायु के पुनर्निर्माण के लिए पराग और बीजाणुओं का उपयोग किया गया। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

उत्तर देखें

सही उत्तर: C — केवल 1 और 3

अध्ययन में ~4250 cal yr BP पर ओक/चीड़ उछाल दर्ज है और पराग व बीजाणुओं को साक्ष्य के रूप में उपयोग किया गया। इसके अनुसार सिंधु और घग्गर-हकरा के किनारे के लोग पूर्वी गंगा मैदानों की ओर गए, पश्चिम की ओर नहीं।

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