किन्नौर में देवदार के वृक्ष-वलयों पर BSIP अध्ययन: लघु हिमयुग के नम वसंत से 1757 के बाद शुष्क स्थिति की ओर बदलाव
10 दिसंबर 2025 को घोषित बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान के अध्ययन में हिमाचल प्रदेश के किन्नौर ज़िले के बटसेरी में देवदार के पेड़ों से पता चला कि लघु हिमयुग के नम वसंत के बाद 1757 ई. से स्थिति शुष्क होती गई।
सारांश
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के स्वायत्त संस्थान बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान (BSIP) के अध्ययन में हिमाचल प्रदेश के किन्नौर में बास्पा नदी पर सांगला घाटी के बटसेरी गाँव के देवदार (Cedrus deodara) के वृक्ष-वलयों का उपयोग किया गया। 10 दिसंबर 2025 को घोषित BSIP अध्ययन में लघु हिमयुग के दौरान नम वसंत से 1757 ई. के बाद क्रमशः शुष्क स्थितियों की ओर बदलाव मिला, और हाल के दशकों में वसंत-सूखे के वर्ष बढ़े हैं। जुलाई 2021 में बटसेरी के पास चट्टान गिरने से प्रेरित यह कार्य हिमालयी भू-आपदाओं की बेहतर भविष्यवाणी और पूर्व चेतावनी में मदद करना चाहता है।
मुख्य तथ्य
- घोषणा
- 10 दिसंबर 2025
- संस्थान
- बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान (DST)
- स्थल
- बटसेरी, सांगला घाटी, बास्पा नदी, किन्नौर (हिमाचल)
- वृक्ष
- देवदार (Cedrus deodara)
- निष्कर्ष
- लघु हिमयुग में नम वसंत; 1757 ई. के बाद शुष्क
- प्रेरणा
- बटसेरी के पास चट्टान गिरना, जुलाई 2021
अभ्यास MCQ 2 प्रश्न
10 दिसंबर 2025 को घोषित, अतीत की जलवायु और भू-आपदाओं के पुनर्निर्माण के लिए बटसेरी, किन्नौर में देवदार के वृक्ष-वलयों का अध्ययन किस संस्थान ने किया?
उत्तर देखें
सही उत्तर: B — बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान
PIB 2201314: अध्ययन DST के स्वायत्त संस्थान बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान (BSIP) ने किया।
बटसेरी के BSIP देवदार अध्ययन के अनुसार, लघु हिमयुग के बाद किस वर्ष के बाद वसंत की स्थितियाँ क्रमशः शुष्क होती गईं?
उत्तर देखें
सही उत्तर: C — 1757 ई.
PIB 2201314: पेड़ों से लघु हिमयुग के नम वसंत से 1757 ई. के बाद क्रमशः शुष्क स्थितियों की ओर बदलाव का पता चला।