बोस संस्थान का अध्ययन: रेगिस्तानी धूल पश्चिमी भारत से पूर्वी हिमालय तक रोगाणु ले जाती है
बोस संस्थान के अध्ययन में पाया गया कि पश्चिमी भारत के शुष्क क्षेत्रों से उठने वाले धूल-तूफ़ान पूर्वी हिमालय की चोटियों तक हवाई रोगाणु ले जाते हैं, जो श्वसन और त्वचा रोगों से जुड़े हैं; यह अध्ययन साइंस ऑफ़ द टोटल एनवायरनमेंट में प्रकाशित हुआ।
सारांश
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के स्वायत्त संस्थान बोस संस्थान के शोधकर्ताओं ने दो वर्ष से अधिक समय तक पश्चिमी भारत के शुष्क क्षेत्रों से उठने वाले धूल-तूफ़ानों की निगरानी की। उन्होंने पाया कि ये तूफ़ान सैकड़ों किलोमीटर तक सिंधु-गंगा मैदान को पार कर हिमालय की चोटियों पर बैठते हैं और श्वसन व त्वचा रोगों से जुड़े रोगाणुओं सहित बैक्टीरिया ले जाते हैं। तलहटी की प्रदूषित हवा का ऊर्ध्वाधर उत्थान भी स्थानीय रोगाणु जोड़ता है, जिससे जठरांत्र संक्रमण भी होते हैं। अध्ययन साइंस ऑफ़ द टोटल एनवायरनमेंट पत्रिका में प्रकाशित हुआ।
मुख्य तथ्य
- संस्थान
- बोस संस्थान (स्वायत्त, DST)
- निष्कर्ष
- पश्चिमी भारत की रेगिस्तानी धूल पूर्वी हिमालय की चोटियों तक रोगाणु ले जाती है
- स्वास्थ्य प्रभाव
- श्वसन और त्वचा रोग; जठरांत्र संक्रमण भी
- निगरानी
- दो वर्ष से अधिक
- पत्रिका
- साइंस ऑफ़ द टोटल एनवायरनमेंट
अभ्यास MCQ 1 प्रश्न
जनवरी 2026 के एक अध्ययन में पाया गया कि पश्चिमी भारत के धूल-तूफ़ान पूर्वी हिमालय की चोटियों तक हवाई रोगाणु ले जाते हैं। यह अध्ययन किस संस्थान ने किया?
उत्तर देखें
सही उत्तर: B — बोस संस्थान
PIB (DST): DST के स्वायत्त संस्थान बोस संस्थान के शोधकर्ताओं ने यह अध्ययन किया, जो साइंस ऑफ़ द टोटल एनवायरनमेंट में प्रकाशित हुआ।