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बोस संस्थान के अध्ययन ने कोलकाता में PM2.5 प्रदूषण के लिए 'विषाक्तता मानक' सुझाया

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 11 अप्रैल 2025 को बताया कि बोस संस्थान, कोलकाता के नेतृत्व में हुए अध्ययन में पाया गया कि कोलकाता में PM2.5 की सांद्रता लगभग 70 µg/m³ पार करते ही उसकी विषाक्तता तेज़ी से बढ़ती है; इसे 'विषाक्तता मानक' के रूप में प्रस्तावित किया गया।

सारांश

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के स्वायत्त संस्थान बोस संस्थान, कोलकाता के शोधकर्ताओं ने प्रो. अभिजीत चटर्जी के नेतृत्व में कोलकाता में अति सूक्ष्म PM2.5 एयरोसोल की विषाक्तता का अध्ययन किया और पाया कि PM2.5 लगभग 70 µg/m³ पार करने पर विषाक्तता तेज़ी से बढ़ती है। उन्होंने इस स्तर को प्रदूषण नियंत्रण के लिए 'विषाक्तता मानक' के रूप में प्रस्तावित किया। बोस संस्थान राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के तहत कोलकाता का नोडल संस्थान है; 2019 में शुरू NCAP का लक्ष्य 131 गैर-प्राप्ति शहरों में 2017 की तुलना में 2026 तक कण प्रदूषण में 40% कमी है।

मुख्य तथ्य

संस्थान
बोस संस्थान, कोलकाता
निष्कर्ष
लगभग 70 µg/m³ से ऊपर PM2.5 विषाक्तता तेज़ी से बढ़ती है
NCAP
2019; 2026 तक 40% कमी (2017 आधार); 131 शहर

अभ्यास MCQ 2 प्रश्न

Q1 उन्नत

कोलकाता पर बोस संस्थान के अध्ययन के अनुसार लगभग किस सांद्रता से ऊपर PM2.5 की विषाक्तता तेज़ी से बढ़ती है?

उत्तर देखें

सही उत्तर: C — 70 µg/m³

70 µg/m³, जिसे शोधकर्ताओं ने 'विषाक्तता मानक' के रूप में प्रस्तावित किया।

Q2 उन्नत

राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इसका लक्ष्य 2017 की तुलना में 2030 तक कण प्रदूषण में 40% कमी है। 2. इसमें 102 गैर-प्राप्ति शहर शामिल हैं। उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

उत्तर देखें

सही उत्तर: D — न तो 1 और न ही 2

न तो 1 और न ही 2 सही है। NCAP का लक्ष्य 2017 की तुलना में 2026 (2030 नहीं) तक कण प्रदूषण में 40% कमी है, 131 (102 नहीं) गैर-प्राप्ति शहरों में।

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